गंभीर शिकायतों पर “थ्रेट असेसमेंट” और डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था जरूरी – अशोक बालियान
गंभीर शिकायतों पर “थ्रेट असेसमेंट” और डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था जरूरी – अशोक बालियान
शाहपुर/मुजफ्फरनगर। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने उत्तर प्रदेश में गंभीर शिकायतों पर पुलिस की कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने की मांग उठाई है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कहा कि जिन मामलों में कोई व्यक्ति अपनी जान को खतरा होने की आशंका व्यक्त करता है, उनमें पुलिस को तत्काल “थ्रेट असेसमेंट” (खतरा मूल्यांकन) की प्रक्रिया अपनानी चाहिए तथा पूरी कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड भी रखा जाना आवश्यक है।
अशोक बालियान ने अपने पत्र में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के बदायूं स्थित बायोगैस प्लांट में हुई हालिया दुखद हत्या की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मामला प्रशासनिक संवेदनशीलता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार घटना से पहले दोनों अधिकारियों ने बदायूं के जिलाधिकारी से मिलकर एक व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से यह भी बताया था कि उन्हें अपनी जान को खतरा है।
बताया जाता है कि जिलाधिकारी द्वारा इस शिकायत को जांच के लिए संबंधित पुलिस अधिकारी को भेज दिया गया था, लेकिन इसके बाद कोई ठोस सुरक्षा या निवारक कदम नहीं उठाया गया। बालियान ने कहा कि जब कोई व्यक्ति लिखित रूप से अपनी हत्या की आशंका व्यक्त करता है, तो केवल शिकायत को जांच के लिए भेज देना पर्याप्त कार्रवाई नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल औपचारिक जांच तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संभावित खतरे को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुरक्षा उपाय भी किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकसित देशों, विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका में इस प्रकार की शिकायतों को “थ्रेट असेसमेंट” के रूप में लिया जाता है। वहां कानून प्रवर्तन एजेंसियां संभावित खतरे का तत्काल आकलन करती हैं, संदिग्ध व्यक्ति से पूछताछ करती हैं और आवश्यकता पड़ने पर उसे हिरासत में भी ले सकती हैं। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को अस्थायी सुरक्षा प्रदान की जाती है तथा कई मामलों में अदालत से restraining order जैसे कानूनी आदेश भी जारी कराए जाते हैं, जिससे संभावित हमलावर शिकायतकर्ता के संपर्क में न आ सके।
अशोक बालियान ने कहा कि भारत में भी इस प्रकार की गंभीर शिकायतों पर अधिक सक्रिय और संवेदनशील कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए सुझाव दिया कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी जान को खतरा होने की लिखित शिकायत की जाती है, तो पुलिस को तत्काल इसे संज्ञेय खतरे के रूप में दर्ज कर प्राथमिकता के आधार पर जांच शुरू करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि संभावित आरोपी से तुरंत पूछताछ की जाए और उसके आचरण व पृष्ठभूमि का आकलन किया जाए। साथ ही शिकायतकर्ता को आवश्यक पुलिस सुरक्षा या निगरानी उपलब्ध कराई जाए। स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा खतरे का जोखिम मूल्यांकन किया जाना चाहिए और आवश्यकता होने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ निवारक धाराओं में कार्रवाई की जाए, ताकि किसी भी संभावित घटना को समय रहते रोका जा सके।
बालियान ने यह भी कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की प्रभावी निगरानी संभव हो सके। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि इस प्रकार की गंभीर शिकायतों के मामलों में पुलिस को “थ्रेट असेसमेंट” की व्यवस्था लागू करने के स्पष्ट निर्देश दिए जाएं, ताकि आम नागरिकों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।











