
हिन्दवी स्वराज्य’ की स्थापना शिवाजी महाराज के राष्ट्र निर्माण के संकल्प का प्रतीक: अशोक बालियान मुजफ्फरनगर, 29 अगस्त। छत्रपति शिवाजी महाराज ने केवल
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मुजफ्फरनगर, 29 अगस्त। छत्रपति शिवाजी महाराज ने केवल मुगलों और आदिलशाही के विरुद्ध युद्ध नहीं लड़ा, बल्कि ‘हिन्दवी स्वराज्य’ की स्थापना कर राष्ट्र निर्माण और सुशासन का आदर्श प्रस्तुत किया। उनके जीवन, शौर्य और प्रशासनिक दृष्टिकोण को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा’ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह बात पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने कही।
बालियान ने बताया कि 27 अगस्त 2026 को पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान के निमंत्रण पर दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित महानाट्य ‘जाणता राजा’ के संबंध में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में महानाट्य के आगामी मंचन की तैयारियों और उसके उद्देश्य पर विस्तार से चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि दिव्य प्रेम सेवा मिशन की स्थापना करने वाले आशीष गौतम ‘भैया जी’ ने अपना जीवन समाज के उपेक्षित और वंचित वर्ग, विशेषकर कुष्ठ रोगियों तथा उनके बच्चों की सेवा के लिए समर्पित किया है। मिशन द्वारा कुष्ठ रोगी सेवा, बाल चिकित्सालय तथा वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा सहित विभिन्न सेवा प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं।
अशोक बालियान के अनुसार, 22 से 28 अक्टूबर 2026 तक गाजियाबाद में ‘जाणता राजा’ का मुख्य मंचन प्रस्तावित है। यह केवल किसी ऐतिहासिक नाटक का मंचन नहीं, बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य, सुशासन और राष्ट्र निर्माण के विचारों को समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। साथ ही, इस आयोजन के जरिए दिव्य प्रेम सेवा मिशन के सेवा प्रकल्पों के लिए संसाधन जुटाने का भी उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का ‘हिन्दवी स्वराज्य’ का विचार भारतीय इतिहास में स्वशासन और आत्मसम्मान की महत्वपूर्ण अवधारणा रहा है। भारत ने विभिन्न ऐतिहासिक चुनौतियों और विदेशी आक्रमणों के बावजूद अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत को बनाए रखा। संत परंपरा और अनेक राष्ट्रनायकों के योगदान ने भारतीय समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखा।
बालियान ने कहा कि पानीपत के तीसरे युद्ध के बाद उत्तर भारत, विशेषकर ऊपरी दोआब क्षेत्र में राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदलीं। बाद के दौर में मराठा शक्ति के विस्तार और महादजी शिंदे के अभियानों ने उत्तर भारत की राजनीति को प्रभावित किया। रोहिल्ला सरदारों के साथ संघर्ष भी इसी व्यापक राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा रहा।
उन्होंने कहा कि इतिहास के विभिन्न प्रसंगों को समझते हुए समाज को अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेनी चाहिए। ‘जाणता राजा’ जैसे महानाट्य युवाओं को इतिहास और राष्ट्रनायकों के योगदान से जोड़ने का काम कर सकते हैं।
अशोक बालियान ने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य समाज को जातिगत और छोटी-छोटी पहचानों से ऊपर उठाकर भारतीय संस्कृति, सेवा और राष्ट्र निर्माण के व्यापक भाव से जोड़ना होना चाहिए। उन्होंने ‘जाणता राजा’ के आयोजन को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया।











