
ममदानी द्वारा मोहन भागवत के कार्यक्रम की आलोचना अनुचित: अशोक बालियान
ममदानी द्वारा मोहन भागवत के कार्यक्रम की आलोचना अनुचित: अशोक बालियान

मुजफ्फरनगर, 27 अगस्त। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम पर की गई टिप्पणी को अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि किसी सांस्कृतिक एवं सामुदायिक कार्यक्रम को उसकी विचारधारा के आधार पर निशाना बनाना उचित नहीं है।
अशोक बालियान ने कहा कि 29 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम प्रस्तावित है। यह आयोजन RSS के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान के तहत ‘अहेड फोरम’ द्वारा किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में लगभग 5,000 भारतीय-अमेरिकी प्रवासियों के शामिल होने की उम्मीद है और इसका आधार ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का विचार है।
बालियान के अनुसार, मेयर ममदानी ने RSS की विचारधारा को ‘विभाजनकारी और बहिष्करणवादी’ बताते हुए कार्यक्रम के प्रति असहमति जताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। किसी संगठन या विचारधारा से असहमति होना अलग बात है, लेकिन किसी समुदाय के कार्यक्रम को लेकर विरोध दर्ज कराना व्यापक सामाजिक संवाद के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन द्वारा ममदानी की टिप्पणी की आलोचना किए जाने का भी उल्लेख किया। बालियान ने कहा कि कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग संगठनों और समूहों की अपनी-अपनी राय हो सकती है, लेकिन सभी पक्षों को तथ्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।
बालियान ने कहा कि कुछ संगठनों द्वारा कार्यक्रम का विरोध किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने वाले कुछ समूह भारत और RSS के प्रति पूर्वाग्रहपूर्ण रुख रखते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसे आरोपों का मूल्यांकन संबंधित संगठनों के सार्वजनिक बयानों और गतिविधियों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि RSS स्वयं को भारतीय संस्कृति, सामाजिक संगठन और राष्ट्रभावना को मजबूत करने वाला संगठन मानता है। ऐसे में विदेशी धरती पर उसके प्रमुख के कार्यक्रम को लेकर होने वाली आलोचना पर संतुलित और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। बालियान ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों को देखते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय संवाद और आपसी सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।











