
भारतीय ज्ञान परंपरा और इतिहास पर अतिथि व्याख्यान आयोजित
भारतीय ज्ञान परंपरा और इतिहास पर अतिथि व्याख्यान आयोजित

शाहपुर। राजकीय महाविद्यालय, शाहपुर में गुरुवार को इतिहास विभाग द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा एवं इतिहास विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के लिबरल आर्ट्स एंड ह्यूमनिटीज विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में व्याख्यान दिया।
डॉ. दुर्गेश कुमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा मानव सभ्यता के विकास के साथ ही प्रारंभ हुई है। इतिहास में पाषाणकाल से लेकर आधुनिक काल तक की घटनाओं एवं विभिन्न तथ्यों का अध्ययन किया जाता है। भारत भूमि पर इतिहास के प्रत्येक काल के अवशेष प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि विंध्य पर्वतमाला में स्थित बेलन घाटी पुरास्थल भारत में मानव के प्रारंभिक विकास का महत्वपूर्ण प्रमाण है। वैदिक एवं हड़प्पा सभ्यता के माध्यम से देश में ज्ञान की निरंतर परंपरा के प्रमाण मिलते हैं।

इसके बाद सुभारती विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग में हिंदी विषय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रेशु ने भारतीय ज्ञान परंपरा एवं हिंदी विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा का विकास वैदिक संस्कृत से हुआ है। संस्कृत उत्तरी भारत की अधिकांश भाषाओं की आदि जननी मानी जाती है। हिंदी का विकास संस्कृत, पालि, प्राकृत और अपभ्रंश के क्रम में हुआ। हिंदी साहित्य की परंपरा आदिकाल से मिलती है और रासो साहित्य आदिकाल की प्रमुख हिंदी साहित्यिक परंपरा है।

दोनों अतिथि व्याख्यानों की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हरीश कुमार ने की। इतिहास विषय के व्याख्यान का संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर आदित्य कुमार तथा हिंदी विषय के व्याख्यान का संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर अरविन्द कुमार ने किया।
इस अवसर पर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संतरेश रानी, असिस्टेंट प्रोफेसर आशु प्रजापति, सुभारती विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अतुल तिवारी, अनुज कुमार, नितिन कुमार, धीरज कुमार,लीला तथा राहुल कुमार सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।











