किसान आंदोलनों से औद्योगिक निवेश पर नकारात्मक संदेश, किसान संगठनों से संयम की अपील

किसान आंदोलनों से औद्योगिक निवेश पर नकारात्मक संदेश, किसान संगठनों से संयम की अपील


मुजफ्फरनगर। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने कहा कि मुजफ्फरनगर में एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे और अन्य विकास परियोजनाओं को लेकर लगातार होने वाले आंदोलनों से औद्योगिक निवेशकों के बीच क्षेत्र के प्रति नकारात्मक संदेश जा सकता है। उन्होंने  सभी किसान संगठनों और किसान नेताओं से विकास परियोजनाओं में अनावश्यक बाधा न डालने तथा किसानों की समस्याओं को उचित मंच पर उठाने की अपील की है।
अशोक बालियान ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे के किनारे औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 27 इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर (IMLC) विकसित कर रही है। मेरठ, उन्नाव, हरदोई और संभल समेत कई जिलों में इन क्लस्टरों के आसपास भूमि आवंटन और औद्योगिक निवेश की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के बड़े अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि मेरठ में बिजौली-खरखौदा क्षेत्र में विकसित किया जा रहा औद्योगिक क्षेत्र गंगा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और रैपिड रेल नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। हाई-स्पीड परिवहन नेटवर्क के किनारे भूमि बैंक विकसित कर फैक्ट्रियों, आईटी पार्कों, मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों और लॉजिस्टिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बालियान ने चिंता जताई कि प्रस्तावित औद्योगिक मैन्युफैक्चरिंग एवं लॉजिस्टिक क्लस्टरों की सूची में मुजफ्फरनगर का नाम नहीं होना क्षेत्र के लिए विचार का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि किसी जिले में एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे या औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर लगातार रास्ता रोकने, धरना-प्रदर्शन या निर्माण कार्यों में बाधा डालने की स्थिति बनी रहती है, तो इसका असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। निवेशक ऐसे क्षेत्र में पूंजी लगाने से पहले भूमि, परिवहन, उत्पादन और कानून-व्यवस्था से जुड़े संभावित व्यवधानों को ध्यान में रखते हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं और जायज मांगों को उठाना उनका अधिकार है। कट, सर्विस रोड, अंडरपास, मुआवजा अथवा अन्य वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से मांग रखी जानी चाहिए। आंदोलन को अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाए, ताकि किसी बड़ी विकास परियोजना पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
अशोक बालियान ने कहा कि मुजफ्फरनगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण कृषि एवं व्यापारिक केंद्र है। यहां एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे के साथ यदि औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स हब और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां विकसित होती हैं तो स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसका लाभ किसानों, व्यापारियों और आने वाली पीढ़ी को भी मिलेगा।
उन्होंने सभी किसान संगठनों से अपील की कि वे किसानों की वास्तविक समस्याओं को मजबूती से उठाएं, लेकिन ऐसी स्थिति पैदा न होने दें जिससे विकास परियोजनाएं प्रभावित हों या निवेशकों में मुजफ्फरनगर के प्रति नकारात्मक धारणा बने। उन्होंने कहा कि किसान हित और औद्योगिक विकास दोनों को साथ लेकर चलने से ही जिले को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।


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