
हमास व ईरान के विरुद्ध अमेरिका-इजराइल की सैन्य कार्रवाई न्यायसंगत —अशोक बालियान चेयरमैन पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन।
हमास व ईरान के विरुद्ध अमेरिका-इजराइल की सैन्य कार्रवाई न्यायसंगत —अशोक बालियान चेयरमैन पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन।

मुजफ्फरनगर, 1 अगस्त। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने कहा कि आतंकी संगठन हमास तथा उसे समर्थन देने वाले ईरान के विरुद्ध अमेरिका और इजराइल द्वारा की जा रही सैन्य कार्रवाई उनके अनुसार न्यायसंगत है। उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र को अपने नागरिकों की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार प्राप्त है।
शनिवार को जारी अपने विस्तृत बयान में अशोक बालियान ने कहा कि वर्ष 2025 में अमेरिका यात्रा के दौरान उन्हें इजराइल के कुछ सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से मिलने का अवसर मिला था। इस दौरान वैश्विक सुरक्षा, आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व में हमास और भारत के जम्मू-कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों की कार्यप्रणाली में समानताएं दिखाई देती हैं।
बालियान ने कहा कि 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हुए हमास के हमले के बाद इजराइल ने अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य अभियान शुरू किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद-51 का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मरक्षा प्रत्येक संप्रभु राष्ट्र का अधिकार है। उन्होंने 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमलों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी आतंकवाद के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई को वैश्विक स्तर पर समर्थन मिला था।
उन्होंने कहा कि भारत ने भी जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से आतंकी नेटवर्क को कमजोर करने में सफलता मिली है। उनके अनुसार आतंकवाद के वित्तीय और सैन्य ढांचे को समाप्त करना किसी भी देश की सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अशोक बालियान ने यह भी कहा कि ईरान पर हमास, हिजबुल्लाह और हूती विद्रोहियों को समर्थन देने के आरोप लंबे समय से लगाए जाते रहे हैं। उनके अनुसार इन संगठनों तक हथियार और आर्थिक सहायता पहुंचने के मार्गों को रोकना क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
अपने बयान में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख किया और कहा कि इस विषय पर विभिन्न देशों के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल का मानना है कि आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई में कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
हालांकि, अशोक बालियान ने यह भी कहा कि किसी भी युद्ध का सबसे दुखद पक्ष यह है कि इसकी सबसे बड़ी कीमत निर्दोष नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को चुकानी पड़ती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसे हालात न बनें और विश्व समुदाय आतंकवाद के समूल उन्मूलन के साथ-साथ स्थायी शांति स्थापित करने के लिए प्रभावी प्रयास करे।











