
विवाहोत्तर संबंधों की बढ़ती प्रवृत्ति परिवार और समाज के लिए चिंता का विषय: अशोक बालियान
विवाहोत्तर संबंधों की बढ़ती प्रवृत्ति परिवार और समाज के लिए चिंता का विषय: अशोक बालियान

मुज़फ्फरनगर, 17 जून। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने कहा कि वर्तमान समय में विवाहोत्तर संबंधों और उनके कारण उत्पन्न होने वाले पारिवारिक बिखराव, सामाजिक तनाव तथा अपराधों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर किए गए विभिन्न सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक अध्ययनों को समाज के प्रत्येक वर्ग को पढ़ना और समझना चाहिए, ताकि परिवारों को टूटने से बचाया जा सके तथा युवाओं को सही दिशा मिल सके।
अशोक बालियान ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली, सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव और रिश्तों में संवाद की कमी के कारण वैवाहिक संबंधों में तनाव बढ़ रहा है। कई बार पति-पत्नी के बीच छोटे-छोटे मतभेदों को सुलझाने के बजाय लोग किसी तीसरे व्यक्ति की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जो आगे चलकर परिवार, बच्चों और स्वयं उनके जीवन के लिए गंभीर संकट पैदा कर देता है।
उन्होंने बताया कि विवाहोत्तर संबंधों के पीछे कई कारण होते हैं। इनमें पति-पत्नी के बीच भावनात्मक दूरी, सम्मान की कमी, शारीरिक असंतुष्टि, कम उम्र में विवाह होने के कारण परिपक्वता का अभाव, कार्यस्थल या सोशल मीडिया पर अचानक विकसित हुआ आकर्षण तथा वैचारिक मतभेद प्रमुख हैं। ऐसे कारणों के चलते लोग क्षणिक भावनाओं में बहकर ऐसे निर्णय ले लेते हैं जिनका परिणाम बाद में दुखद साबित होता है।
बालियान ने कहा कि समाचारों में लगातार ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें विवाहोत्तर संबंधों का अंत हत्या, आत्महत्या, ब्लैकमेलिंग, घरेलू हिंसा या अन्य गंभीर अपराधों के रूप में होता है। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो कई लोग वैवाहिक तनाव से बचने के लिए नए संबंधों में अत्यधिक विश्वास कर लेते हैं और वास्तविक परिस्थितियों को नजरअंदाज कर देते हैं। प्रारंभ में आकर्षक लगने वाला व्यक्ति बाद में हिंसक, स्वार्थी या गैर-जिम्मेदार साबित हो सकता है, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती है।
उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपने परिवार और सामाजिक दायरे से दूरी बना लेता है तो वह मानसिक और भावनात्मक रूप से अकेला पड़ जाता है। ऐसी स्थिति में वह पूरी तरह दूसरे व्यक्ति पर निर्भर हो जाता है, जिससे शोषण, ब्लैकमेलिंग और आर्थिक नुकसान की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। कई मामलों में जब रिश्तों को लेकर अपेक्षाएं टूटती हैं या विवाह का वादा पूरा नहीं होता, तब विवाद गंभीर रूप धारण कर लेते हैं।
अशोक बालियान ने समाज से अपील करते हुए कहा कि पारिवारिक समस्याओं का समाधान संवाद, धैर्य और आपसी समझ से निकालना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में अपने परिवार, बच्चों और सामाजिक प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने वाले निर्णय नहीं लेने चाहिए। यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग या मानसिक उत्पीड़न का शिकार हो रहा है तो उसे तुरंत परिवार, समाज और कानून की सहायता लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मजबूत परिवार ही मजबूत समाज की नींव होते हैं। इसलिए वैवाहिक जीवन में विश्वास, पारदर्शिता, सम्मान और संवाद को बढ़ावा देकर ही विवाहोत्तर संबंधों से उत्पन्न होने वाली सामाजिक त्रासदियों को रोका जा सकता है। समाज को जागरूक करने और पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने के लिए इस विषय पर गंभीर चर्चा समय की आवश्यकता है।











