खामेनेई की मौत पर मातम को लेकर उठा विवाद: अशोक बालियान ने कश्मीर की शिया महिलाओं से पूछा—क्या गिरिजा टिकू जैसी पीड़ितों पर भी जताई संवेदना?

खामेनेई की मौत पर मातम को लेकर उठा विवाद: अशोक बालियान ने कश्मीर की शिया महिलाओं से पूछा—क्या गिरिजा टिकू जैसी पीड़ितों पर भी जताई संवेदना?


दिनांक: 03 मार्च 2026 | स्थान: मुज़फ्फरनगर
मुज़फ्फरनगर में पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की कथित मौत पर कश्मीर सहित कई स्थानों पर हुए मातम को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने खामेनेई के लिए सड़कों पर उतरकर शोक जताया, क्या उन्होंने कभी कश्मीरी हिंदू महिलाओं पर हुए अत्याचारों के लिए भी आवाज उठाई।
अशोक बालियान ने कहा कि 1990 के दशक में जम्मू कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं के पलायन और हत्याओं की घटनाएं देश के इतिहास का दर्दनाक अध्याय हैं। उन्होंने विशेष रूप से गिरिजा टिकू प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय हुई क्रूरता को देश कभी भूल नहीं सकता। बालियान ने कहा कि समाज के सभी वर्गों को ऐसे मामलों पर समान संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में श्रीनगर के लाल चौक, बडगाम और लखनऊ सहित कुछ स्थानों पर शिया समुदाय की महिलाओं ने खामेनेई के निधन की खबरों के बाद प्रदर्शन और मातम किया। बालियान के अनुसार, यह प्रतिक्रिया धार्मिक आस्था से जुड़ी हो सकती है, लेकिन देश के भीतर हुई त्रासदियों पर भी समान संवेदना अपेक्षित है।
बालियान ने कहा कि 1979 की ईरानी इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान में महिलाओं के अधिकारों पर लगे प्रतिबंधों को लेकर वहां लंबे समय से असंतोष रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की बड़ी आबादी सरकार से असंतुष्ट रही है और समय-समय पर विरोध प्रदर्शन भी होते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर भी यह बहस चल रही है कि क्या विदेशों के धार्मिक नेताओं के लिए दिखाई गई भावनात्मक एकजुटता देश के भीतर पीड़ित समुदायों के प्रति भी दिखाई गई है। उनके अनुसार, इस मुद्दे ने “दोहरे मापदंड” को लेकर चर्चा को जन्म दिया है।
बालियान ने यह भी कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के पीछे हमास, हिज्बुल्लाह और हुती जैसे संगठनों को कथित समर्थन एक बड़ा कारण बताया जाता रहा है। उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हुए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस घटना के बाद पश्चिम एशिया की स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

फिलहाल, इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विभिन्न पक्षों द्वारा अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि मामला भावनात्मक, धार्मिक और राजनीतिक आयामों से जुड़ा हुआ है।


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