
घरेलू हिंसा, बुजुर्गों की हत्या रोकने के लिए कानूनी व प्रशासनिक सुधार जरूरी: अशोक बालियान
घरेलू हिंसा, बुजुर्गों की हत्या रोकने के लिए कानूनी व प्रशासनिक सुधार जरूरी: अशोक बालियान 
मुजफ्फरनगर, 25 जुलाई। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर घरेलू हिंसा, बुजुर्गों के उत्पीड़न तथा गंभीर पारिवारिक अपराधों की रोकथाम के लिए व्यापक कानूनी एवं प्रशासनिक सुधार लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में प्रदेश में सामने आई कुछ घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और यह दर्शाती हैं कि घरेलू हिंसा एवं बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए वर्तमान व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
अशोक बालियान ने अपने पत्र में बहराइच में बेटे द्वारा अपनी मां की कुल्हाड़ी से हत्या तथा प्रतापगढ़ में नशे के आदी बेटे द्वारा अपने पिता की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं समाज के लिए गंभीर चेतावनी हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में पुलिस तभी प्रभावी कार्रवाई कर पाती है, जब पीड़ित स्वयं शिकायत दर्ज कराए, जबकि भारतीय सामाजिक परिस्थितियों में वृद्ध माता-पिता, महिलाएं अथवा अन्य आश्रित सदस्य लोक-लाज, पारिवारिक दबाव, भय या आर्थिक निर्भरता के कारण अपने ही परिजनों के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं। परिणामस्वरूप लगातार हिंसा के बावजूद समय पर हस्तक्षेप नहीं हो पाता और कई बार मामला हत्या जैसे जघन्य अपराध तक पहुंच जाता है।
उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं का संरक्षण अधिनियम-2005, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) तथा वरिष्ठ नागरिकों के संरक्षण संबंधी कानून मौजूद हैं, लेकिन गंभीर घरेलू हिंसा के मामलों में जोखिम आधारित त्वरित हस्तक्षेप की व्यवस्था को और अधिक मजबूत किए जाने की जरूरत है। उनका कहना था कि राज्य की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
अशोक बालियान ने अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां गंभीर घरेलू हिंसा के मामलों में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर कार्रवाई केवल पीड़ित की शिकायत पर निर्भर नहीं रहती। न्यायालय आवश्यक होने पर ‘नो-कॉन्टैक्ट ऑर्डर’ और ‘इमरजेंसी प्रोटेक्शन ऑर्डर’ जैसे संरक्षणात्मक आदेश भी जारी कर सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप ऐसे प्रभावी प्रावधानों का अध्ययन कर प्रदेश में भी आवश्यक सुधार किए जाएं।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से यूपी-112 की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में संशोधन कर घरेलू हिंसा, बुजुर्ग उत्पीड़न एवं उच्च जोखिम वाले पारिवारिक विवादों में तत्काल जोखिम मूल्यांकन, पीड़ित की सुरक्षा, अनिवार्य पुलिस हस्तक्षेप तथा संबंधित विभागों को तत्काल सूचना देने की व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही घरेलू हिंसा एवं बुजुर्ग सुरक्षा संबंधी मामलों के लिए पुलिस को विशेष दिशा-निर्देश जारी करने, यूपी-112 कर्मियों और पुलिस अधिकारियों को जोखिम पहचान एवं मानसिक तनाव से जुड़े मामलों का विशेष प्रशिक्षण देने, प्रत्येक जनपद में हाई रिस्क फैमिली मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करने तथा प्रत्येक पुलिस रिस्पांस व्हीकल (पीआरवी) में रिस्क असेसमेंट चेकलिस्ट उपलब्ध कराने का भी सुझाव दिया गया है।
अंत में अशोक बालियान ने कहा कि यदि जोखिम वाले मामलों में समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप की व्यवस्था विकसित की जाती है तो अनेक बुजुर्ग माता-पिता, महिलाओं एवं अन्य आश्रित सदस्यों का जीवन सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन सुझावों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक प्रशासनिक एवं नीतिगत निर्णय लेने का अनुरोध किया है।











