
बार-बार के किसान आंदोलनों से कृषि सुधार और किसान हित प्रभावित हो रहे हैं : अशोक बालियान
बार-बार के किसान आंदोलनों से कृषि सुधार और किसान हित प्रभावित हो रहे हैं : अशोक बालियान

मुज़फ्फरनगर, 16 जुलाई। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने कहा है कि किसानों की उचित और न्यायसंगत मांगों के समर्थन में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन आवश्यक हैं, लेकिन लगातार होने वाले अनिश्चितकालीन आंदोलनों से कृषि सुधार, निवेश, रोजगार और देश के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसान हितों की रक्षा के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण और वैज्ञानिक सुधारों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
अशोक बालियान ने जारी बयान में कहा कि वर्ष 2020-21 में तीन कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेतृत्व में व्यापक आंदोलन हुआ था, जिसके बाद केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए। इसके बावजूद विभिन्न मुद्दों पर किसान संगठनों के आंदोलन लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि अब कुछ संगठनों द्वारा “देश बचाओ मोर्चा” बनाकर भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में आंदोलन की घोषणा की गई है, जबकि समझौते का अंतिम स्वरूप अभी सार्वजनिक भी नहीं हुआ है। उनका कहना था कि किसी भी नीति या समझौते का मूल्यांकन उसके अंतिम प्रावधानों के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल आशंकाओं के आधार पर।
उन्होंने दावा किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से बासमती चावल, आम, अंगूर, मसाले, जैविक उत्पाद और समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है। ऐसे में तथ्यों और वैज्ञानिक आधार पर चर्चा होना अधिक आवश्यक है। उनका कहना था कि जब तथ्यों की जगह आशंकाएं और एकतरफा नैरेटिव हावी हो जाते हैं तो सबसे अधिक नुकसान किसानों और कृषि क्षेत्र को उठाना पड़ता है।
अशोक बालियान ने कहा कि जब भी किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने, कृषि अवसंरचना विकसित करने या निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां लाई जाती हैं, तब तकनीकी और आर्थिक पहलुओं पर चर्चा करने के बजाय उन्हें लेकर भय का माहौल बनाया जाता है। इससे सरकारें भी कई बार सुधारात्मक कदम पीछे खींच लेती हैं और कृषि क्षेत्र पुराने ढर्रे पर ही चलता रहता है।
उन्होंने कहा कि देश के 85 प्रतिशत से अधिक किसान छोटे और सीमांत हैं, जिन्हें बेहतर बाजार, आधुनिक तकनीक, कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग और स्थानीय स्तर पर रोजगार की अधिक आवश्यकता है। उनका आरोप था कि कुछ कथित किसान नेता किसानों के नाम पर लंबे आंदोलन चलाकर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि लगातार विरोध की राजनीति का असर कृषि अनुसंधान और नई तकनीकों पर पड़ा है। बीटी कपास से किसानों को लाभ मिला, लेकिन एचटीबीटी कपास, जीएम सरसों और बीटी बैंगन जैसी तकनीकों पर अभी तक व्यापक निर्णय नहीं हो सके। उनका मत था कि इन विषयों पर राजनीतिक नारों के बजाय वैज्ञानिक परीक्षण और पारदर्शी नियामकीय प्रक्रिया के आधार पर निर्णय होना चाहिए।
पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती लागत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों, निवेश और अनुसंधान की आवश्यकता है। संगठन ने सभी किसान संगठनों से अपील की कि वे किसी भी आंदोलन की शुरुआत ठोस तथ्यों, उचित मांगों और व्यावहारिक समाधान के साथ करें, ताकि किसानों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ कृषि सुधार और ग्रामीण विकास भी गति पकड़ सके।











