
धरने के दौरान भाषाई मर्यादा टूटना उचित नहीं था : अशोक बालियान
धरने के दौरान भाषाई मर्यादा टूटना उचित नहीं था : अशोक बालियान

मुजफ्फरनगर। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने मुजफ्फरनगर में हाल ही में हुए एक धरना-प्रदर्शन के दौरान प्रयुक्त भाषा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में भाषाई मर्यादा का उल्लंघन उचित नहीं माना जा सकता।
अशोक बालियान ने जारी अपने बयान में कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और रिपोर्टों के अनुसार एक सम्मानित व्यक्ति द्वारा कांवड़ सेवा शिविर से जुड़े विवाद और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ आयोजित धरने के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री एवं स्थानीय विधायक कपिल देव अग्रवाल तथा अन्य वर्गों के लिए आपत्तिजनक और विवादित शब्दों का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो यह सार्वजनिक जीवन की गरिमा और स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि धरना स्थल पर एक अन्य वक्ता द्वारा भी मंत्री कपिल देव अग्रवाल के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में संबंधित सम्मानित व्यक्ति उस वक्ता के भाषण के दौरान तालियां बजाते हुए दिखाई दे रहे हैं। बालियान ने कहा कि किसी भी मंच से ऐसी भाषा का प्रयोग या उसका समर्थन समाज में गलत संदेश देता है।
पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन ने कहा कि समाज में प्रतिष्ठित और जिम्मेदार पदों पर आसीन व्यक्तियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने आचरण और शब्दों से संयम, शालीनता तथा मर्यादा का परिचय दें। विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन लोकतांत्रिक संवाद में व्यक्तिगत टिप्पणी, अपमानजनक भाषा और कटु शब्दों का प्रयोग किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
अशोक बालियान ने कहा कि जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न वर्गों के बीच वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मतभेद को मनभेद में बदलने वाली भाषा समाज में सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और सार्वजनिक मंचों पर शालीन भाषा का प्रयोग करने की अपील की।
उन्होंने संबंधित सम्मानित व्यक्ति से आग्रह किया कि वे पूरे घटनाक्रम पर आत्ममंथन करें और भविष्य में सार्वजनिक मंचों पर ऐसी परिस्थितियों से बचने का प्रयास करें। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद, शिष्टाचार और पारस्परिक सम्मान की परंपरा को मजबूत करना सभी जिम्मेदार नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का दायित्व है।











