
दिल्ली में NEET प्रदर्शन को लेकर पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने जताई आपत्ति, अशोक बालियान बोले— वास्तविक अभ्यर्थियों की भागीदारी थी नगण्य
दिल्ली में NEET प्रदर्शन को लेकर पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने जताई आपत्ति, अशोक बालियान बोले— वास्तविक अभ्यर्थियों की भागीदारी थी नगण्य

मुजफ्फरनगर, 24 जुलाई। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने दिल्ली में आयोजित NEET परीक्षा से जुड़े प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके संगठन के अनुसार इस प्रदर्शन में वास्तविक NEET अभ्यर्थियों की भागीदारी बेहद कम थी। उन्होंने दावा किया कि धरने में अधिक संख्या तमाशबीनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की थी, जबकि वास्तविक परीक्षा अभ्यर्थी बहुत कम दिखाई दिए। इसी आधार पर उन्होंने स्पष्ट किया कि पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन इस कथित आंदोलन का समर्थन नहीं करता।
अशोक बालियान ने कहा कि यदि किसी प्रदर्शन में तोड़फोड़, हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और आपत्तिजनक राजनीतिक नारेबाजी जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो उसे शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई को केवल “छात्रों पर कार्रवाई” के रूप में प्रस्तुत करना वास्तविक स्थिति का पूर्ण चित्र नहीं दर्शाता।
उन्होंने कहा कि संगठन के ऑन-ग्राउंड ऑब्जर्वेशन के अनुसार आंदोलन के पीछे एक संगठित लॉजिस्टिक एवं समन्वय तंत्र कार्य करता हुआ दिखाई दिया, जो पूरे प्रदर्शन के संचालन में सक्रिय था। उनका कहना था कि किसी भी आंदोलन का समर्थन करने से पहले उसके वास्तविक स्वरूप, नेतृत्व और उद्देश्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन उसकी आड़ में हिंसा, अराजकता या देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले प्रयासों का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए।
अशोक बालियान ने अपने बयान में कहा कि 3 मई 2026 को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा NEET-UG परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके बाद 8 मई को प्राप्त सूचनाओं के आधार पर मामला केंद्रीय एजेंसियों को भेजा गया तथा 12 मई को परीक्षा रद्द कर सीबीआई जांच शुरू कराई गई। उन्होंने दावा किया कि अब तक 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है तथा सरकार ने 37 दिनों के भीतर दोबारा परीक्षा आयोजित कराई। साथ ही बायोमेट्रिक सत्यापन, AI मॉनिटरिंग, व्यापक CCTV निगरानी और सुरक्षित प्रश्नपत्र परिवहन जैसी अतिरिक्त व्यवस्थाएं लागू की गईं तथा भविष्य में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को शुरुआत में ही वास्तविक छात्रों को बुलाकर उनसे संवाद करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि इन सभी कदमों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में छात्रों का विश्वास बहाल करना था और अधिकांश छात्र पुनः अपनी पढ़ाई में लौट गए, जबकि उनके नाम पर विभिन्न समूह आंदोलन करते रहे।
अपने बयान में अशोक बालियान ने यह भी आरोप लगाया कि शाहीन बाग, किसान आंदोलन और अब NEET प्रदर्शन में सोशल मीडिया पर माहौल बनाने, विशेष हैशटैग चलाने तथा बड़े पैमाने पर टेंट, लाउडस्पीकर, सोशल मीडिया व्लॉगर्स और सामुदायिक भोजन जैसी व्यवस्थाओं में समानता देखने को मिली है। उन्होंने दावा किया कि इन आंदोलनों में सुरक्षा एजेंसियों की छवि खराब करने और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाने का पूर्व नियोजित नैरेटिव चलाया जाता है।
अंत में उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे किसी भी आंदोलन का समर्थन करने से पहले उसके वास्तविक उद्देश्य, नेतृत्व और स्वरूप का निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक अधिकारों का दुरुपयोग न हो सके।
(नोट: यह समाचार पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान द्वारा जारी बयान पर आधारित है। इसमें व्यक्त दावे और आरोप उनके व्यक्तिगत/संगठनात्मक विचार हैं।)











