
यूजीसी नियम विवाद पर बोले पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन चेयरमैन अशोक बालियान, ‘विरोध का अधिकार है, पर टूलकिट से राष्ट्रविरोधी ताकतों को लाभ’
यूजीसी नियम विवाद पर बोले पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन चेयरमैन अशोक बालियान, ‘विरोध का अधिकार है, पर टूलकिट से राष्ट्रविरोधी ताकतों को लाभ’
मुजफ्फरनगर, 21 फरवरी 2026। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” को लेकर चल रहे विवाद पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी सरकारी नीति का विरोध करना सभी को अधिकार है, लेकिन मोदी-योगी विरोधी कथित “टूलकिट” का हिस्सा बनने से राष्ट्रविरोधी और हिंदू विरोधी शक्तियों को लाभ मिल सकता है।
बालियान ने कहा कि यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से ये नियम लागू किए थे। कुछ हिंदू समूहों ने आरोप लगाया कि इन नियमों में झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर दंड का स्पष्ट प्रावधान नहीं है और सामान्य वर्ग को संरक्षण से बाहर रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रकार का नैरेटिव असत्य है और इससे स्वर्ण हिंदुओं में भ्रम फैलाया गया, जिसके कारण अनावश्यक विवाद उत्पन्न हुआ।
उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी रूप से कोई भी व्यक्ति, चाहे वह सामान्य वर्ग से हो, भेदभाव की शिकायत दर्ज करा सकता है, क्योंकि नियमों में कहीं भी ऐसा नहीं लिखा कि सामान्य वर्ग शिकायत नहीं कर सकता। बालियान के अनुसार, दंड के स्पष्ट प्रावधान के अभाव के बावजूद शिकायत दर्ज करने पर कोई रोक नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि इक्विटी समिति में कम से कम सात सदस्य होते हैं, जिनमें एससी/एसटी/ओबीसी के तीन सदस्य अनिवार्य हैं, जबकि शेष सदस्य सामान्य वर्ग से हो सकते हैं, इसलिए सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव का दावा भ्रामक है।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को इन नियमों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है और फिलहाल वर्ष 2012 के पुराने नियम प्रभावी हैं। बालियान ने कहा कि कुछ पत्रकारों, सोशल मीडिया समूहों और संगठनों ने इस मुद्दे को “ब्राह्मण विरोधी” या सामान्य वर्ग विरोधी बताकर माहौल को अनावश्यक रूप से गर्माया है। उनका आरोप है कि संगठित तरीके से हिंदुओं को जाति के आधार पर बांटने और केंद्र सरकार को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने इलाहाबाद माघ मेले के एक हालिया विवाद का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ लोग जानबूझकर धार्मिक आयोजनों को विवादित बनाकर उत्तर प्रदेश सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने 8 मार्च 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित “यूजीसी रोलबैक महा आंदोलन” का जिक्र करते हुए कहा कि विरोध करने वाले संगठनों को अपने कदमों के व्यापक प्रभाव पर विचार करना चाहिए।
बालियान ने साधु-संतों और हिंदू संगठनों से अपील की कि वे समाज को जोड़ने का कार्य करें, न कि ऐसी भाषा या रणनीति अपनाएं जिससे समाज में विभाजन पैदा हो। उन्होंने कहा कि यदि यूजीसी नियमों को लेकर असंतोष है तो उसका समाधान संवाद और संवैधानिक माध्यमों से निकाला जाना चाहिए।
उन्होंने अंत में कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन व्यवस्था को अस्थिर करने वाली प्रवृत्तियों से सावधान रहना आवश्यक है, क्योंकि सामाजिक बिखराव से देश विरोधी ताकतों को अवसर मिल सकता है।











