
प्रेम-संबंधित हिंसा व संभावित अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस स्तर पर सुधार व कानून में बदलाव आवश्यक — अशोक बालियान
प्रेम-संबंधित हिंसा व संभावित अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस स्तर पर सुधार व कानून में बदलाव आवश्यक — अशोक बालियान

मुजफ्फरनगर। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने प्रेम-संबंधों से जुड़ी बढ़ती हिंसक घटनाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पुलिस स्तर पर नीतिगत सुधार और कानून में आवश्यक बदलाव की मांग की है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में प्रदेश, विशेषकर जनपद मुजफ्फरनगर और एनसीआर क्षेत्र में प्रेम व निजी संबंधों से जुड़े मामलों में हत्या और आत्महत्या जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक हैं।
अशोक बालियान ने पत्र में उल्लेख किया कि मुजफ्फरनगर में एक युवक ने शादी से मात्र तीन दिन पूर्व युवती की गला रेतकर हत्या कर दी और इसके बाद उसी चाकू से अपना भी गला काटकर आत्महत्या कर ली। इससे कुछ दिन पहले ही इसी जनपद में सोनिया नामक महिला ने अपने 12 वर्ष पुराने प्रेमी संजीव की, अपने गांव के ही एक अन्य साथी शादिक के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से हत्या कर दी। वहीं ग्रेटर नोएडा में दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल की लिव-इन पार्टनर द्वारा लाइसेंसी पिस्टल से स्वयं को गोली मार लेने की घटना ने भी पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2018 में विवाहेतर संबंध (एडल्ट्री) को अपराध की श्रेणी से हटाए जाने के बाद यह केवल वैवाहिक विवाद का विषय बनकर रह गया है, जबकि वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में विवाह संस्था पर बढ़ते दबाव, पारिवारिक विघटन और उससे उत्पन्न मानसिक व सामाजिक तनाव को देखते हुए इस विषय पर पुनर्विचार आवश्यक है। अशोक बालियान ने विवाहेतर संबंधों को पुनः दंडनीय अपराध घोषित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
पीजेंट चेयरमैन के अनुसार प्रेम संबंधों में हिंसा को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारणों में अस्वीकृति को स्वीकार न कर पाना, विश्वासघात की भावना, अत्यधिक ईर्ष्या, प्रतिशोध और अस्वस्थ मानसिकता शामिल हैं। युवाओं में रिश्तों की असफलता को समझने और उससे उबरने की शिक्षा का अभाव है। सोशल मीडिया पर उपलब्ध हिंसक कंटेंट भी कई बार गलत प्रेरणा देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के कारण अपराधियों में सजा का भय कम होता जा रहा है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार सजा की गंभीरता से अधिक उसकी निश्चितता अपराध रोकने में प्रभावी होती है। इसलिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का विस्तार, अनावश्यक अपील प्रक्रियाओं पर संतुलित नियंत्रण और पुलिस जांच की गुणवत्ता में सुधार जरूरी है।
अशोक बालियान ने पुलिस की भूमिका को केवल अपराध के बाद कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए अपराध-निवारण पर केंद्रित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रेम व रिलेशनशिप हिंसा से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित जोखिम मूल्यांकन किया जाए, प्रशिक्षित अधिकारियों की तैनाती हो और खतरा अधिक होने पर तत्काल सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं। अंत में उन्होंने आशा जताई कि राज्य सरकार इस गंभीर विषय को संज्ञान में लेकर आवश्यक नीतिगत निर्णय और निर्देश जारी करेगी।











