संविदा लाइनमैन ऋषिपाल की मौत पर दो दिन तक चला बवाल, समझौता लागू होने के बाद समाप्त हुआ धरना, हुआ अंतिम संस्कार
संविदा लाइनमैन ऋषिपाल की मौत पर दो दिन तक चला बवाल, समझौता लागू होने के बाद समाप्त हुआ धरना, हुआ अंतिम संस्कार

शाहपुर। निर्माना विद्युत उपकेंद्र पर शटडाउन के दौरान करंट लगने से संविदा लाइनमैन ऋषिपाल की हुई दर्दनाक मौत के बाद शुरू हुआ विवाद गुरुवार को भी जारी रहा। पोस्टमार्टम के बाद बुधवार शाम शव गांव पहुंचने पर परिजनों और ग्रामीणों ने बिजलीघर पर शव रखकर धरना दिया था। देर रात प्रशासन और विद्युत विभाग के अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में मृतक परिवार को आर्थिक सहायता, बीमा राशि तथा परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने सहित विभिन्न मांगों पर लिखित सहमति बनने के बाद धरना स्थगित कर दिया गया था, लेकिन गुरुवार सुबह समझौते के अनुरूप पूरी कार्रवाई न होने पर परिजनों और ग्रामीणों ने शव को दोबारा बिजलीघर पर रखकर धरना शुरू कर दिया।
धरने की सूचना मिलते ही विद्युत विभाग और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। थाना प्रभारी गजेंद्र सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। ग्रामीणों की बढ़ती भीड़ के बीच पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान के भाई प्रोफेसर विवेक बालियान, पूर्व जिला पंचायत सदस्य धीरेंद्र बालियान, सदर तहसीलदार राधेश्याम गौड़ तथा विद्युत विभाग के एसडीओ निर्भीक भारती भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से वार्ता की।

कई घंटे चली बातचीत के बाद अधिकारियों ने बताया कि बुधवार रात हुए समझौते को लागू किया जा रहा है। विद्युत कर्मचारियों की ओर से घोषित ₹6 लाख की सहायता राशि में से ₹3 लाख पहले ही उपलब्ध करा दिए गए थे। गुरुवार को एसडीओ निर्भीक भारती ने मृतक परिवार को ₹3 लाख का चेक सौंपा तथा शेष सहायता राशि, संविदा कर्मचारियों के लिए निर्धारित ₹10 लाख के आकस्मिक दुर्घटना बीमा, व अन्य आर्थिक सहायता तथा परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी दिलाने की प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी कराने का आश्वासन दिया। साथ ही समाजसेवियों की ओर से भी परिवार को आर्थिक सहयोग दिलाने की बात कही गई।
इन आश्वासनों के बाद परिजन और ग्रामीण धरना समाप्त करने पर सहमत हो गए। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे गांव के श्मशान घाट पर ऋषिपाल का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बना रहा।

धरने के दौरान ग्राम प्रधान पुत्र मुकुल त्यागी, आजाद समाज पार्टी के पदाधिकारी तथा अनेक सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। दो दिन तक चले इस घटनाक्रम के शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त होने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली। वहीं ग्रामीणों ने मांग की कि हादसे की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।












