
शटडाउन में कथित लापरवाही से संविदा लाइनमैन की मौत, देर रात तक बिजलीघर पर धरना; मुआवजा, नौकरी और बीमा पर बनी सहमति
शटडाउन में कथित लापरवाही से संविदा लाइनमैन की मौत, देर रात तक बिजलीघर पर धरना; मुआवजा, नौकरी और बीमा पर बनी सहमति

शाहपुर। क्षेत्र के गांव निर्माना स्थित विद्युत उपकेंद्र पर तैनात 38 वर्षीय संविदा लाइनमैन ऋषिपाल की बुधवार को करंट लगने से हुई दर्दनाक मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश देर रात तक जारी रहा। पोस्टमार्टम के बाद शाम को जब ऋषिपाल का शव गांव पहुंचा तो परिजनों और ग्रामीणों ने शव को निर्माना बिजलीघर पर रखकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। घंटों चले धरने के बाद प्रशासन, विद्युत विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच मृतक परिवार को आर्थिक सहायता, बीमा राशि और परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने की लिखित सहमति बनने पर धरना समाप्त हुआ।

जानकारी के अनुसार ऋषिपाल पिछले करीब 15 वर्षों से निर्माना विद्युत उपकेंद्र पर संविदा लाइनमैन के रूप में कार्यरत था। बुधवार सुबह करीब 10 बजे वह गांव निर्माणी में सुखबीर पुत्र अतर सिंह के जोड़े पर टूटे बिजली के तार को जोड़ने गया था। आरोप है कि उसने ड्यूटी पर तैनात एसएसओ संदीप कुमार से फोन पर शटडाउन लिया और लाइन बंद होने की पुष्टि मिलने के बाद खंभे पर चढ़कर कार्य शुरू किया। इसी दौरान अचानक लाइन में करंट आ गया, जिससे तेज धमाके के साथ वह झुलसकर खंभे से नीचे गिर पड़ा। मौके पर मौजूद किसानों और साथी विद्युत कर्मियों ने उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

सूचना मिलते ही शाहपुर थाना प्रभारी गजेंद्र सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भिजवाया। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। मृतक अपने पीछे पत्नी सुशीला, 13 वर्षीय पुत्री राधा तथा तीन पुत्र देव (11 वर्ष), अमर (9 वर्ष) और आयुष (7 वर्ष) को छोड़ गया है। ग्रामीणों के अनुसार परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। बारिश के कारण उनका मकान भी जर्जर हो चुका है और परिवार पॉलिथीन डालकर किसी तरह जीवनयापन कर रहा है।






प्रत्यक्षदर्शी गौतम शर्मा ने आरोप लगाया कि ऋषिपाल ने निर्माणी लाइन का शटडाउन लिया था, लेकिन ड्यूटी पर तैनात एसएसओ ने दूसरी लाइन बंद कर दी, जबकि संबंधित लाइन चालू रही। इसी वजह से करंट आने से यह हादसा हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद संबंधित एसएसओ दैनिक विवरण पुस्तिका और मोबाइल लेकर मौके से चला गया। वहीं, विद्युत विभाग के एसडीओ से घटना के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने जांच का हवाला देते हुए कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग सरकारी कर्मचारी को बचाने के लिए मामले की लीपापोती कर रहा है।
शाम को पोस्टमार्टम के बाद जब ऋषिपाल का शव गांव पहुंचा तो परिजनों और ग्रामीणों ने शव को निर्माना बिजलीघर परिसर में रखकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। धरने की सूचना पर क्षेत्रीय सांसद हरेन्द्र मलिक, बरवाला के पूर्व प्रधान एवं जिला पंचायत सदस्य सत्येंद्र बालियान, पूर्व जिला पंचायत सदस्य धीरेंद्र बालियान, आजाद समाज पार्टी के नेता रंजन वीर एडवोकेट तथा सोनू कश्यप भी मौके पर पहुंचे और शोकाकुल परिवार को सांत्वना देते हुए उनकी मांगों का समर्थन किया।
धरना स्थल पर समय बीतने के साथ ग्रामीणों की संख्या लगातार बढ़ती गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सदर, सदर तहसीलदार राधेश्याम गौड़, विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) इंद्र भानु सिंह तथा क्षेत्राधिकारी बुढ़ाना गजेंद्र पाल सिंह मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों और ग्रामीणों से वार्ता कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। कई घंटे चली वार्ता के बाद प्रशासन, विद्युत विभाग और ग्रामीणों के बीच लिखित सहमति बनी।
समझौते के अनुसार विद्युत कर्मचारियों की ओर से मृतक के परिवार को ₹5 लाख, प्रशासन की ओर से ₹2.50 लाख, संविदा कर्मचारियों के लिए निर्धारित आकस्मिक दुर्घटना बीमा योजना के तहत ₹10 लाख तथा मृतक के परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने पर सहमति बनी। विद्युत अधिकारियों ने कर्मचारियों के सहयोग से एकत्रित ₹3 लाख की राशि मौके पर ही परिजनों को सौंप दी, जबकि शेष ₹2 लाख अंतिम संस्कार से पूर्व देने का आश्वासन दिया। अन्य सहायता राशि विभागीय नियमों के अनुसार उपलब्ध कराई जाएगी।
इस दौरान गांव और आसपास के क्षेत्र से हजारों ग्रामीण धरना स्थल पर मौजूद रहे। पूरे क्षेत्र में घटना को लेकर शोक और आक्रोश का माहौल बना रहा। ग्रामीणों ने मांग की कि हादसे की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।











