
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह किसानों के सच्चे हितैषी थे : अशोक बालियान
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह किसानों के सच्चे हितैषी थे : अशोक बालियान

शाहपुर/मुजफ्फरनगर। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं किसान नेता चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि चौधरी चरण सिंह किसानों, मजदूरों और गरीब वर्ग के सच्चे हितैषी थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन किसान हितों और ग्रामीण भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया।
अशोक बालियान ने कहा कि चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के एक किसान परिवार में हुआ था। किसान परिवार से होने के कारण उन्होंने किसानों की समस्याओं को नजदीक से देखा और उनके समाधान के लिए राजनीति को माध्यम बनाया। उनका मानना था कि जब तक किसान खुशहाल नहीं होगा, तब तक देश और प्रदेश का समुचित विकास संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए। वर्ष 1939 में कृषकों के कर्ज मुक्ति विधेयक को पारित कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, वहीं वर्ष 1952 में जमींदारी उन्मूलन विधेयक लागू कराने में उनका योगदान किसानों के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। इसके अलावा भूमि हदबंदी कानून लागू कराने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अशोक बालियान ने कहा कि चौधरी चरण सिंह हमेशा खेती-किसानी को देश की अर्थव्यवस्था का आधार मानते थे और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य के पक्षधर रहे। उनका मानना था कि किसान, मजदूर और गरीब वर्ग के उत्थान से ही भारत का वास्तविक विकास संभव है।
उन्होंने बताया कि चौधरी चरण सिंह वर्ष 1952, 1962 और 1967 में विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए तथा वर्ष 1969 और बाद में 1970 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। वर्ष 1977 में वह केंद्र सरकार में गृहमंत्री बने और बाद में वित्त मंत्री एवं उपप्रधानमंत्री के रूप में भी कार्य किया। उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की स्थापना भी हुई।
अशोक बालियान ने कहा कि चौधरी चरण सिंह 28 जुलाई 1979 को देश के पांचवें प्रधानमंत्री बने। उन्होंने कहा कि राजनीति में उनकी छवि एक सिद्धांतवादी, ईमानदार और अनुशासनप्रिय नेता की रही। 29 मई 1987 को उनका निधन हो गया, लेकिन किसान नेता के रूप में उनकी पहचान आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जीवित है। इस अवसर पर अशोक बालियान ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।











