
आलू, प्याज और टमाटर के मॉडल रेट निर्धारित हों: अशोक बालियान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर उठाई मांग, किसानों को लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा देने और भावांतर भुगतान व्यवस्था लागू करने की पैरवी
आलू, प्याज और टमाटर के मॉडल रेट निर्धारित हों: अशोक बालियान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर उठाई मांग, किसानों को लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा देने और भावांतर भुगतान व्यवस्था लागू करने की पैरवी
मुजफ्फरनगर, 26 अक्टूबर। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने केंद्र सरकार से देशभर में आलू, प्याज और टमाटर जैसी जल्दी खराब होने वाली सब्जियों के लिए मॉडल रेट निर्धारित करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने तथा खेत से खुदरा बाजार तक कीमतों में होने वाले भारी अंतर को कम करने के लिए प्रभावी नीति लागू करने की अपील की है।
अशोक बालियान ने पत्र में कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नवंबर 2024 में महाराष्ट्र और नई दिल्ली में आयोजित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के कार्यक्रमों में आलू, प्याज और टमाटर जैसी जल्दी खराब होने वाली सब्जियों के लिए मॉडल रेट निर्धारित करने की नीति पर काम करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि जब किसान अपनी प्याज पांच से छह रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचकर निकल जाता है, तो बाद में खुदरा बाजार में उसकी कीमत अचानक क्यों बढ़ जाती है? यह सवाल कृषि विपणन व्यवस्था में मौजूद गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है।
अशोक बालियान के अनुसार, खेत से बाजार तक पहुंचने के दौरान सब्जियों की कीमतों में होने वाली असामान्य वृद्धि का लाभ वास्तविक उत्पादक किसान को नहीं मिल पाता। वहीं, दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं को भी महंगी सब्जियां खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जबकि उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। ऐसे में उत्पादन लागत और बाजार मूल्य के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने बागवानी फसलों के खेत पर मिलने वाले मूल्य और खुदरा बाजार में बिकने वाली कीमत के बीच अंतर कम करने के उपायों का अध्ययन करने के लिए आधिकारिक स्तर पर एक समिति का गठन किया था। हालांकि, उनके अनुसार, इस पहल के बावजूद देशव्यापी स्तर पर पारदर्शी भावांतर पोर्टल और व्यवस्थित मॉडल रेट तंत्र लागू किए जाने की आवश्यकता बनी हुई है।
सीधे किसानों के खाते में पहुंचे अंतर की राशि
पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन ने सुझाव दिया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के माध्यम से सब्जियों की उत्पादन लागत का वैज्ञानिक आकलन किया जाए और लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर मॉडल रेट निर्धारित किए जाएं। यदि बाजार में किसानों को मिलने वाला वास्तविक मूल्य निर्धारित मॉडल रेट से कम रहता है, तो दोनों के बीच के अंतर की पात्र राशि भावांतर भुगतान के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा सकती है।
उन्होंने राज्यों को परिवहन सब्सिडी देने की व्यवस्था पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि इससे किसानों को अपनी उपज दूरस्थ मंडियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी और बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को इस व्यवस्था से राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें कम कीमत पर फसल बेचने के कारण आर्थिक नुकसान और कर्ज की समस्या का सामना करना पड़ता है।
अशोक बालियान ने केंद्र सरकार से मांग की कि किसानों के हित में मॉडल रेट निर्धारित करने की नीति को जल्द से जल्द लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि पारदर्शी मूल्य निर्धारण और प्रभावी भावांतर भुगतान व्यवस्था से सब्जी उत्पादक किसानों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल मिल सकता है। साथ ही, खेत से खुदरा बाजार तक कीमतों के अंतर को कम करने और उपभोक्ताओं को उचित दरों पर सब्जियां उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।











