दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों के पीछे वैश्विक गठजोड़ का आरोप, अशोक बालियान ने उठाए सवाल वैचारिक टूलकिट के जरिए भारत की संप्रभुता, लोकतांत्रिक संस्थाओं और विकास को प्रभावित करने का दावा, किसानों व युवाओं से सतर्क रहने की अपील

दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों के पीछे वैश्विक गठजोड़ का आरोप, अशोक बालियान ने उठाए सवाल
वैचारिक टूलकिट के जरिए भारत की संप्रभुता, लोकतांत्रिक संस्थाओं और विकास को प्रभावित करने का दावा, किसानों व युवाओं से सतर्क रहने की अपील


शाहपुर। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर वैश्विक गठजोड़ और कथित वैचारिक टूलकिट पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठन और तत्व भ्रामक नैरेटिव के माध्यम से भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं, आर्थिक आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक प्रगति को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने किसानों और युवाओं से ऐसे मुद्दों को तथ्यों और तर्कों के आधार पर परखने की अपील की।
अशोक बालियान ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर अराजकता फैलाने और संवैधानिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर एक साथ विशेष हैशटैग का चलना, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और प्रदर्शनकारियों के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं किया जाना किसी संगठित रणनीति की ओर संकेत कर सकता है। हालांकि, इन गतिविधियों के पीछे किसी वैश्विक गठजोड़ के होने के आरोपों को उन्होंने अपने विचारों के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने भारतीय निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण बताया। बालियान के मुताबिक, मतदाता सूची में मृत, स्थानांतरित और नए पात्र मतदाताओं से संबंधित विवरणों को अद्यतन करना जरूरी है, ताकि चुनावी प्रक्रिया अधिक सटीक और पारदर्शी बन सके। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों का समाधान निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।
किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए बालियान ने तीन कृषि कानूनों की वापसी को भारतीय कृषि के लिए नुकसानदायक बताया। उनका कहना है कि इन कानूनों का उद्देश्य किसानों को बिचौलियों पर निर्भरता से बाहर निकालना और बाजार के अधिक विकल्प उपलब्ध कराना था। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रामक प्रचार के कारण किसानों के बीच भ्रम पैदा हुआ। वहीं, कृषि कानूनों को लेकर किसानों की आपत्तियों और आंदोलन के व्यापक प्रभाव पर भी उन्होंने अपनी राय रखी।
बालियान ने शिक्षा व्यवस्था, जीएम सरसों की स्वदेशी तकनीक और कपास की नई बीज तकनीकों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक नवाचारों और कृषि उत्पादन बढ़ाने वाली तकनीकों पर निर्णय लेते समय देश की खाद्य सुरक्षा तथा किसानों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने राफेल सौदे, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और जज लोया प्रकरण का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर भारत की छवि खराब करने के प्रयास किए गए।
अंत में अशोक बालियान ने किसानों और युवाओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों की सत्यता जांचें और किसी भी राजनीतिक या वैचारिक अभियान से प्रभावित होने के बजाय तथ्यों के आधार पर अपना मत बनाएं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति का सम्मान जरूरी है, लेकिन राष्ट्रीय हितों, संवैधानिक संस्थाओं और विकास से जुड़े विषयों पर जिम्मेदारी के साथ चर्चा होनी चाहिए।


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