
योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणी को लेकर पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने जताई नाराजगी, ‘टूलकिट’ के जरिए अराजकता फैलाने की साजिश का आरोप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखने की अपील, युवाओं को सोशल मीडिया के प्रभाव से सतर्क रहने की दी सलाह
योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणी को लेकर पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने जताई नाराजगी,
‘टूलकिट’ के जरिए अराजकता फैलाने की साजिश का आरोप
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखने की अपील, युवाओं को सोशल मीडिया के प्रभाव से सतर्क रहने की दी सलाह
मुजफ्फरनगर, 16 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की नेता नेहा बोरा द्वारा कथित तौर पर की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने नाराजगी जताई है। उन्होंने इस तरह की बयानबाजी को लोकतांत्रिक संवाद की मर्यादा के विपरीत बताते हुए आरोप लगाया कि ‘टूलकिट’ के सहारे युवाओं को उकसाकर देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
अशोक बालियान ने कहा कि गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए कथित तौर पर ‘गुंडा’, ‘दंगाई’ और ‘लंपट’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना स्वस्थ लोकतांत्रिक आलोचना की परंपरा के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को सरकार और जनप्रतिनिधियों की नीतियों का विरोध करने तथा सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन आलोचना के दौरान सार्वजनिक मर्यादा और भाषा की गरिमा बनाए रखना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ किसी भी व्यक्ति के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने की खुली छूट नहीं है। समाज में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की अपेक्षा की जाती है, उसी प्रकार सार्वजनिक जीवन में सक्रिय प्रत्येक व्यक्ति से दूसरों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की उम्मीद की जानी चाहिए। कानून और सामाजिक मर्यादा सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
बांग्लादेश के आंदोलन का हवाला देने पर उठाए सवाल
अशोक बालियान ने कथित बयान में बांग्लादेश के आंदोलन का हवाला देकर भारत में भी वैसी स्थिति की बात किए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक और सामाजिक बदलाव संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से होने चाहिए। हिंसा, अराजकता और अस्थिरता को बढ़ावा देने वाले विचार देश के सामाजिक तथा लोकतांत्रिक वातावरण के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।
उन्होंने दावा किया कि देश का युवा विकास, रोजगार, तकनीक और डिजिटल क्रांति जैसे मुद्दों पर आगे बढ़ना चाहता है। ऐसे में युवाओं को उग्र नारों और भावनात्मक अपीलों के प्रभाव में आने के बजाय किसी भी संगठन की विचारधारा, उद्देश्यों और गतिविधियों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाहिए।
सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर युवाओं को किया सतर्क
बालियान ने कहा कि सोशल मीडिया के एल्गोरिदम के कारण उपयोगकर्ताओं को अक्सर उनकी पसंद और विचारों से मिलती-जुलती सामग्री बार-बार दिखाई देती है। इससे कई बार व्यक्ति एक सीमित वैचारिक दायरे में सिमट जाता है, जिसे ‘इको चैंबर’ कहा जाता है। ऐसी स्थिति में युवाओं के लिए जरूरी है कि वे अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझें, तथ्यों की जांच करें और किसी भी वायरल वीडियो या पोस्ट को बिना सत्यापन के स्वीकार न करें।
उन्होंने कांग्रेस, राहुल गांधी और कुछ विपक्षी दलों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक शक्तियां छात्र, किसान और अन्य सामाजिक आंदोलनों को समाधान की दिशा में ले जाने के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए उनका इस्तेमाल करती हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई विशिष्ट प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
आंदोलनों के वित्तपोषण की पारदर्शी जांच की मांग
पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन ने कहा कि किसी भी आंदोलन के पीछे संसाधनों और वित्तपोषण को लेकर सवाल उठते हैं तो उनकी जांच तथ्यों और कानून के आधार पर की जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित एजेंसियों से ऐसे मामलों की पारदर्शी पड़ताल करने की मांग की।
अशोक बालियान ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति का महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन किसी भी आंदोलन को कानून के दायरे में रहकर ही संचालित किया जाना चाहिए। उन्होंने कथित अभद्र बयानबाजी की जांच कराए जाने और यदि कानून का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक सौहार्द और जिम्मेदार संवाद को प्राथमिकता दें।











