
पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का पवित्र पर्व है श्राद्ध: अशोक बालियान पितृ पक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने की परंपरा, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा समापन
पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का पवित्र पर्व है श्राद्ध: अशोक बालियान
पितृ पक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने की परंपरा, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा समापन

मुजफ्फरनगर। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने कहा कि श्राद्ध अपने दिवंगत पूर्वजों (पितरों) के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का एक पवित्र अनुष्ठान है। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक एवं पारिवारिक महत्व माना गया है। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर को प्रथम श्राद्ध के साथ हो चुकी है, जबकि इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या, जिसे पितृ मोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है, के दिन होगा।
उन्होंने बताया कि जिन परिजनों अथवा पूर्वजों की मृत्यु की सही तिथि ज्ञात नहीं होती, उनका श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जाता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए जल, पिंड तथा अन्य श्रद्धापूर्वक अर्पण करते हैं।
अशोक बालियान के अनुसार श्राद्ध कर्म में मुख्य रूप से तीन पीढ़ियों के पूर्वजों—पिता, दादा और परदादा—का स्मरण किया जाता है। चावल अथवा जौ से बनाए गए पिंड तथा जल अर्पित कर पितरों के प्रति सम्मान व्यक्त करने की परंपरा है। हिंदू शास्त्रीय मान्यताओं में तीन पीढ़ियों से ऊपर के पितरों के संबंध में भी विशेष धार्मिक अवधारणाएं वर्णित हैं।
उन्होंने कहा कि श्राद्ध केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि परिवार की नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के योगदान और संस्कारों से जोड़ने वाली परंपरा भी है। इतिहास एवं धर्म संबंधी विभिन्न विद्वानों के लेखों में भी श्राद्ध को जीवित परिवार और दिवंगत पूर्वजों के बीच भावनात्मक संबंध बनाए रखने वाली परंपरा के रूप में वर्णित किया गया है।
उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने, परिवार की परंपराओं को याद रखने और सामाजिक व पारिवारिक मूल्यों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।











