
उत्तर प्रदेश सहित देश में स्थापित हों वैश्विक रोजगारोन्मुख कृषि पाठ्यक्रम एवं कृषि CAD/CAM/CAE सेंटर ऑफ एक्सीलेंस : अशोक बालियान
उत्तर प्रदेश सहित देश में स्थापित हों वैश्विक रोजगारोन्मुख कृषि पाठ्यक्रम एवं कृषि CAD/CAM/CAE सेंटर ऑफ एक्सीलेंस : अशोक बालियान

मुजफ्फरनगर। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने देश में कृषि शिक्षा को आधुनिक तकनीक एवं वैश्विक रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) के मंत्री जयंत चौधरी को पत्र भेजकर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में वैश्विक रोजगारोन्मुख कृषि पाठ्यक्रम और “कृषि CAD/CAM/CAE सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित किए जाने का सुझाव दिया है।

अशोक बालियान ने अपने पत्र में कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि महाविद्यालयों और इंटरमीडिएट (कृषि) संस्थानों से प्रतिवर्ष हजारों विद्यार्थी कृषि शिक्षा प्राप्त करते हैं। हालांकि वर्तमान कृषि शिक्षा अभी भी मुख्य रूप से पारंपरिक खेती तक सीमित है, जबकि विश्व का कृषि क्षेत्र तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), कृषि ड्रोन, रोबोटिक्स, प्रिसिजन फार्मिंग, डेटा एनालिटिक्स, जीआईएस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तथा CADCAM//CAE आधारित कृषि इंजीनियरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ चुका है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, नीदरलैंड, इजराइल, जापान और खाड़ी देशों में कृषि तकनीक विशेषज्ञों, कृषि ड्रोन ऑपरेटरों, कृषि डेटा विश्लेषकों, ग्रीनहाउस विशेषज्ञों, कृषि मशीनरी डिजाइन इंजीनियरों, फूड प्रोसेसिंग विशेषज्ञों तथा एग्री-बिजनेस प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। यदि भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, कृषि शिक्षा को वैश्विक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप पुनर्गठित करता है तो लाखों युवाओं के लिए देश और विदेश में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश आम, आलू, गन्ना, दूध, सब्जी और खाद्यान्न उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। यदि कृषि शिक्षा को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर कृषि मूल्य श्रृंखला, कृषि निर्यात, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि वित्त, कृषि विपणन और कृषि तकनीक से जोड़ा जाए, तो ग्रामीण युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किए जा सकते हैं।
अशोक बालियान ने सुझाव दिया कि कृषि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में “ग्लोबल एग्री बिजनेस एंड टेक्नोलॉजी स्कूल” स्थापित किए जाएं, जहां कृषि ड्रोन तकनीक, एआई एवं डेटा एनालिटिक्स, कृषि रोबोटिक्स, स्मार्ट फार्मिंग, हाइड्रोपोनिक खेती, कृषि निर्यात, खाद्य प्रसंस्करण तथा एग्री-बिजनेस प्रबंधन जैसे आधुनिक विषयों में रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित हों।
इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश सहित देशभर में चरणबद्ध तरीके से “कृषि CAD/CAM/CAE सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित करने की मांग की, जहां CAD डिजाइन लैब, CNC मशीनिंग लैब, कृषि ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र, जीआईएस एवं रिमोट सेंसिंग लैब, एआई एवं डेटा एनालिटिक्स प्रयोगशाला, कृषि रोबोटिक्स लैब तथा स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों।
उन्होंने कृषि छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट सेल, विदेशी भाषा प्रशिक्षण, कृषि तकनीक आधारित स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन तथा कौशल विकास मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, आईसीएआर, आईआईटी कानपुर, एकेटीयू और कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स गठित करने की भी मांग की।
अशोक बालियान का कहना है कि इस पहल से कृषि छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे, कृषि तकनीक एवं एग्री-बिजनेस उद्योगों का विकास होगा तथा उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी कृषि तकनीकी और कृषि निर्यात केंद्र बन सकेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की दूरदर्शी पहल विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।











