
युवाओं को बचपन से ही सिखाया जाना चाहिए कि रिश्तों का टूटना जीवन का अंत नहीं है : अशोक बालियान
युवाओं को बचपन से ही सिखाया जाना चाहिए कि रिश्तों का टूटना जीवन का अंत नहीं है : अशोक बालियान
मुजफ्फरनगर, । पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले को लेकर पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने कहा कि युवाओं को बचपन से ही यह सिखाया जाना चाहिए कि किसी रिश्ते का टूटना या असफल होना जीवन का अंत नहीं होता। जीवन में आने वाली परिस्थितियों का सामना संवाद, समझदारी और धैर्य के साथ किया जाना चाहिए, न कि अपराध के रास्ते पर चलकर।
उन्होंने कहा कि इस मामले में आरोपी सिया गोयल एक शिक्षित और संभ्रांत परिवार से संबंध रखती थी तथा उसके पास कॉमर्स की डिग्री भी थी, लेकिन शिक्षा के बावजूद वह नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं से दूर हो गई। उन्होंने कहा कि केवल डिग्रियां व्यक्ति को सफल नहीं बनातीं, बल्कि संस्कार, सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी ही एक अच्छे इंसान का निर्माण करती हैं।
अशोक बालियान ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में नैतिक शिक्षा और जीवन मूल्यों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। जब किसी व्यक्ति में सहानुभूति और संवेदनशीलता समाप्त हो जाती है तो वह दूसरे व्यक्ति को केवल अपनी राह का अवरोध समझने लगता है। यही स्थिति समाज के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को बचपन से ही अस्वीकार्यता और विफलता को स्वीकार करना सिखाया जाना चाहिए। यदि कोई रिश्ता टूट जाता है या मनचाहा परिणाम नहीं मिलता है तो उसका समाधान अपराध नहीं बल्कि संवाद और समझदारी होती है। परिवारों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करें और उनकी भावनाओं तथा समस्याओं को समझने का प्रयास करें।
अशोक बालियान ने कहा कि इंटरनेट और डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग कर अपराध की साजिश रचने वाले यह समझ लें कि आधुनिक साइबर तकनीक और जांच एजेंसियों से बच पाना लगभग असंभव है। पुलिस की साइबर विंग डिजिटल गतिविधियों और संचार के माध्यमों की प्रभावी निगरानी करने में सक्षम है।
उन्होंने सुझाव दिया कि पुलिस अधिकारियों और साइबर सेल के विशेषज्ञों को समय-समय पर विद्यालयों और महाविद्यालयों में जाकर युवाओं के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए, ताकि उन्हें कानून, साइबर अपराध और उनके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जा सके। साथ ही युवाओं के मन में यह विश्वास भी विकसित किया जाना चाहिए कि हर समस्या का समाधान बातचीत और कानून के दायरे में रहकर निकाला जा सकता है।
अशोक बालियान ने कहा कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में त्वरित और समयबद्ध न्याय व्यवस्था लागू होनी चाहिए, जिससे अपराधियों में कानून का भय बना रहे। उन्होंने कहा कि समाज, परिवार, शिक्षा संस्थानों और प्रशासन को मिलकर ऐसी परिस्थितियां तैयार करनी होंगी, जहां युवा मानसिक दबाव और भावनात्मक चुनौतियों का सामना सकारात्मक तरीके से कर सकें और अपराध जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।











