
लखनऊ अग्निकांड के बाद सख्त कानून की मांग, यूपी में लागू हो ‘कोचिंग एवं व्यावसायिक संस्थान सुरक्षा अधिनियम’ : अशोक बालियान
लखनऊ अग्निकांड के बाद सख्त कानून की मांग, यूपी में लागू हो ‘कोचिंग एवं व्यावसायिक संस्थान सुरक्षा अधिनियम’ : अशोक बालियान
मुजफ्फरनगर, 23 जून। लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए दर्दनाक कोचिंग सेंटर अग्निकांड में 15 छात्र-छात्राओं की मौत के बाद प्रदेशभर में शोक और आक्रोश का माहौल है। इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सामाजिक संगठन ‘पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन’ के चेयरमैन चौधरी अशोक बालियान ने उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल सख्त सुरक्षा कानून लागू करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजकर प्रदेश में कोचिंग सेंटरों एवं व्यावसायिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक सुधार करने का आग्रह किया है।
चौधरी अशोक बालियान ने अपने पत्र में कहा कि लखनऊ की घटना केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर परिणाम है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी और कठोर सुरक्षा नियम लागू किए गए होते तो कई निर्दोष विद्यार्थियों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने अमेरिका में लागू अग्नि सुरक्षा मानकों का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रदेश में भी उसी प्रकार के सख्त प्रावधान लागू करने की आवश्यकता बताई।
पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए सुझावों में प्रमुख रूप से प्रत्येक कोचिंग सेंटर और व्यावसायिक भवन में दोहरे आपातकालीन निकास द्वार तथा ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम को अनिवार्य करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि अमेरिका में राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा मानक (NFPA) के तहत ऐसी व्यवस्थाएं अनिवार्य हैं, जिससे आग लगने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
अशोक बालियान ने क्षमता निर्धारण (ऑक्यूपेंसी लिमिट) को भी आवश्यक बताते हुए कहा कि प्रत्येक कक्ष के बाहर स्पष्ट रूप से यह अंकित होना चाहिए कि उसमें अधिकतम कितने लोग बैठ सकते हैं। उन्होंने कहा कि छोटे कमरों में क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाना सीधे तौर पर सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है और इसे दंडनीय अपराध घोषित किया जाना चाहिए।
उन्होंने अपने पत्र में जीवन सुरक्षा संबंधी नियमों के पालन हेतु “जीरो टॉलरेंस नीति” लागू करने की भी मांग की। उनका कहना है कि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति, संस्था अथवा संगठन को सुरक्षा मानकों में छूट देने का प्रावधान पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना है कि यदि किसी असुरक्षित भवन को फायर एनओसी जारी की जाती है और बाद में वहां हादसा होता है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने सभी कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की फायर एनओसी की स्थिति को सार्वजनिक डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध कराने की भी मांग की है, ताकि छात्र, अभिभावक और आम नागरिक स्वयं सुरक्षा मानकों की जानकारी प्राप्त कर सकें।
चौधरी अशोक बालियान ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि उनके सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द से जल्द “उत्तर प्रदेश कोचिंग एवं व्यावसायिक संस्थान (सुरक्षा एवं विनियमन) अधिनियम” लागू किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।











