
यज्ञ संसार का सर्वश्रेष्ठ कर्म, वेद मानव जीवन के सच्चे मार्गदर्शक : हरवीर सिंह आर्य
यज्ञ संसार का सर्वश्रेष्ठ कर्म, वेद मानव जीवन के सच्चे मार्गदर्शक : हरवीर सिंह आर्य

शाहपुर। क्षेत्र के गांव गोयला स्थित आर्य समाज मंदिर में श्रावण मास के अवसर पर वैदिक यज्ञ एवं सत्संग का आयोजन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर यज्ञ में आहुति दी तथा वैदिक विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
यज्ञ के ब्रह्मा हरवीर सिंह आर्य ने कहा कि यज्ञ संसार का सर्वश्रेष्ठ कर्म है और सनातन वैदिक धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है। उन्होंने बताया कि यह धर्म चारों वेद—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद—पर आधारित है। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक वर्षा होने के कारण प्राचीन समय में ऋषि-मुनि मैदानी क्षेत्रों में आकर गृहस्थों के यहां यज्ञ आयोजित करते थे तथा वेदों का प्रचार-प्रसार करते थे।
उन्होंने कहा कि वेद संपूर्ण सृष्टि का संविधान हैं। इनमें आत्मज्ञान और परमात्मा के ज्ञान के साथ-साथ भौतिक विज्ञान, गणित, भूगोल, शस्त्र-शास्त्र, संगीत, आयुर्वेद, सामाजिक व्यवस्था तथा जीवन के विभिन्न आयामों का विस्तृत ज्ञान समाहित है। उन्होंने लोगों से वैदिक संस्कृति को अपनाने और यज्ञ परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

आर्य समाज के प्रधान राज सिंह आर्य ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए बच्चों और महिलाओं को यज्ञ, वेदों तथा आर्य समाज की शिक्षाओं से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल चर्चा करने से कोई लाभ नहीं होता, बल्कि जीवन में अच्छे विचारों को आचरण में उतारना ही वास्तविक धर्म है। उन्होंने सभी लोगों से वैदिक संस्कारों को अपनाकर समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की अपील की।
इस अवसर पर जयप्रकाश, सुरेंद्र सिंह आर्य, ब्रजवीर सिंह सहित आर्य समाज के अनेक गणमान्य सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।











