
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में किसानों के हित सुरक्षित, निर्यात के खुलेंगे नए अवसर: अशोक बालियान
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में किसानों के हित सुरक्षित, निर्यात के खुलेंगे नए अवसर: अशोक बालियान
मुजफ्फरनगर। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं और किसान संगठनों द्वारा जताई जा रही आशंकाओं के बीच सरकार और विशेषज्ञों की ओर से यह स्पष्ट किया जा रहा है कि इस समझौते में भारतीय किसानों के हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने कहा कि किसानों को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक तथ्यों और आर्थिक आंकड़ों का अध्ययन करना चाहिए, ताकि वे भ्रम और अफवाहों का शिकार न हों।
उन्होंने बताया कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत का आम सेब उत्पादक किसान मंडियों में अपना सेब लगभग 50 से 80 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचता है, जबकि अमेरिकी सेब भारतीय बाजार में खुदरा स्तर पर लगभग 120 से 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंचेगा। ऐसे में अमेरिकी सेब भारतीय किसानों के बाजार को प्रभावित करने की स्थिति में नहीं होगा।
अशोक बालियान ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों जैसे वियतनाम, थाईलैंड, चीन, बांग्लादेश, मलेशिया और श्रीलंका की तुलना में अमेरिकी बाजार में कम टैरिफ दर का लाभ मिलेगा। यदि यह प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त भविष्य में समाप्त होती है तो भारत इस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत के कृषि एवं एमएसएमई क्षेत्र के उत्पादों को बड़ी राहत देते हुए लगभग 1.36 अरब डॉलर मूल्य के कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क शून्य कर दिया है। इसका सबसे अधिक लाभ भारतीय मसाला उत्पादकों, फल उत्पादकों, चाय और कॉफी उद्योग तथा समुद्री उत्पाद निर्यातकों को मिलेगा। आम, केला, अमरूद, पपीता, अनानास, कीवी और एवोकाडो जैसे फलों को भी अमेरिकी बाजार में बिना शुल्क प्रवेश मिलेगा।
वहीं दूसरी ओर भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अपने बाजार को सीमित और नियंत्रित तरीके से खोला है। केवल एक्स्ट्रा-लॉन्ग स्टेपल कपास, कुछ सूखे मेवे, सीमित मात्रा में पशु चारा तथा कुछ विशेष उत्पादों पर ही नियंत्रित रियायतें दी गई हैं।
अशोक बालियान ने कहा कि भारतीय किसानों के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा भारत की “नेगेटिव लिस्ट” है, जिसमें गेहूं, चावल, मक्का, मोटे अनाज, डेयरी उत्पाद, दालें, सब्जियां, चीनी तथा तिलहन जैसी प्रमुख फसलों और उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। इसके अतिरिक्त आनुवंशिक रूप से संशोधित यानी जीएम मक्का और सोयाबीन उत्पादों के आयात पर भी प्रतिबंध जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान आंकड़ों के अनुसार अमेरिका के साथ व्यापार में भारत का लगभग 34.4 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष है और यह समझौता भारतीय निर्यात को और मजबूत करेगा। वस्त्र, चमड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ बागवानी और कृषि क्षेत्र को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
अशोक बालियान के अनुसार भारत सरकार ने इस समझौते में ऐसे कानूनी और आर्थिक सुरक्षा प्रावधान शामिल किए हैं, जिनसे भारतीय किसानों के हितों को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचेगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे किसी भी राष्ट्रीय नीति या व्यापार समझौते पर राय बनाने से पहले आधिकारिक और तथ्यात्मक जानकारी का अध्ययन अवश्य करें।











