आयुष मलिक सुनियोजित ऑनलाइन धर्मांतरण रैकेट और ब्रेनवॉशिंग का शिकार, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की मांग

आयुष मलिक सुनियोजित ऑनलाइन धर्मांतरण रैकेट और ब्रेनवॉशिंग का शिकार, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की मांग


मुजफ्फरनगर, 13 जून 2026। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने दावा किया है कि शामली जनपद के चर्चित आयुष मलिक प्रकरण में युवक एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन धर्मांतरण रैकेट तथा ब्रेनवॉशिंग का शिकार हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रशासन और पुलिस को गहन जांच के साथ-साथ पीड़ित की मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक पुनर्वास प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
अशोक बालियान ने बताया कि 12 जून को एक प्रतिनिधिमंडल ने शामली के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर इस प्रकरण के संबंध में विस्तृत प्रार्थना-पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी प्रकार के दबाव, धोखे या प्रलोभन के आधार पर धर्मांतरण किया गया है तो वह कानून के अनुसार वैध नहीं माना जाएगा तथा संबंधित तथ्यों की जांच की जा रही है।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के समक्ष यह भी आग्रह रखा कि आयुष मलिक का मनोवैज्ञानिक एवं मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन कराया जाए, जिससे यह पता लगाया जा सके कि वह किसी प्रकार की मानसिक, सामाजिक अथवा डिजिटल ब्रेनवॉशिंग प्रक्रिया का शिकार तो नहीं हुआ। बालियान ने बताया कि इस विषय पर आयुष के पिता देवराज मलिक से भी चर्चा की गई है और परिवार न्याय एवं उचित सहायता की अपेक्षा कर रहा है।
उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार की शिकायत और दर्ज एफआईआर के आधार पर शामली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी चांदनी कुरैशी तथा उसके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, जो विभिन्न पहलुओं की जांच कर रहा है। जांच एजेंसियां डिजिटल माध्यमों, सोशल मीडिया संपर्कों तथा कथित ऑनलाइन नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं।
अशोक बालियान ने कहा कि आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने के प्रयास बढ़े हैं। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक सुनियोजित मानसिक प्रभाव या ब्रेनवॉशिंग का शिकार होता है तो उसे उस स्थिति से बाहर निकालने के लिए विशेषज्ञ मनोवैज्ञानिकों, मनोचिकित्सकों और पारिवारिक काउंसिलर्स की सहायता आवश्यक होती है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि आयुष की काउंसिलिंग, मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण और विधिक संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण पक्ष युवक का मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक पुनर्वास है। प्रशासन, पुलिस और परिवार को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जिससे वह सामान्य जीवन में लौट सके और स्वयं को सुरक्षित महसूस करे।
अंत में अशोक बालियान ने विश्वास व्यक्त किया कि निष्पक्ष जांच, कानूनी प्रक्रिया और परिवार के सहयोग से आयुष मलिक शीघ्र ही सामान्य जीवन में लौटेगा तथा उसके हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने समाज से भी अपील की कि मामले को संवेदनशीलता के साथ देखें और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने का इंतजार करें।


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