भारत–अमेरिका व्यापार समझौते से किसानों को मिलेगा नया बाजार, निर्यात बढ़ने की उम्मीद–अशोक बालियान

भारत–अमेरिका व्यापार समझौते से किसानों को मिलेगा नया बाजार, निर्यात बढ़ने की उम्मीद–अशोक बालियान


नई दिल्ली। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमेन अशोक बालियान ने सोमवार, 9 फ़रवरी को नीति आयोग, नई दिल्ली में नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद्रा से मुलाकात कर भारत–अमेरिका संभावित व्यापार समझौते के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि यह समझौता भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकता है और किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति प्रदान कर सकता है।
प्रो. रमेश चंद्रा ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार सहयोग का उद्देश्य भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करते हुए निर्यात को बढ़ावा देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत केवल उन्हीं कृषि उत्पादों का आयात करेगा जिनकी देश में वास्तविक कमी है, ताकि घरेलू बाजार और किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। उनका मानना है कि संतुलित नीति के साथ किया गया यह समझौता कृषि उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात श्रृंखला को मजबूत करेगा।
अशोक बालियान ने कहा कि इस पहल से भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिकी बाजार में शून्य या कम शुल्क पर बेहतर पहुंच मिल सकती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का अधिक मूल्य प्राप्त होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि यदि निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ढांचा विकसित किया गया, तो छोटे और मध्यम किसानों को भी वैश्विक बाजार से सीधे लाभ मिल सकेगा।
बैठक के दौरान साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में भारत ने अमेरिका को लगभग 20–25 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का निर्यात किया है। इनमें बासमती और गैर-बासमती चावल, चाय, कॉफी, मसाले, काजू, तिलहन, बेक्ड उत्पाद, फल-सब्जियाँ, प्रोसेस्ड फूड, शहद, वनस्पति उत्पाद, मसालों के तेल व ओलेओरेजिन्स, तिल, अन्य वन उत्पाद, रेडी-टू-ईट भोजन, आम का गूदा, स्नैक्स-नमकीन तथा झींगा सहित समुद्री खाद्य प्रमुख रूप से शामिल रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिका ने इसी अवधि में भारत को लगभग 7–9 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद निर्यात किए, जिनमें बादाम-पिस्ता जैसे ट्री नट्स, एथेनॉल व पशु-चारा, कपास, दालें, सीमित मात्रा में डेयरी उत्पाद, फीड/फॉडर और आवश्यक तेल प्रमुख रहे।
इन आंकड़ों के आधार पर भारत का अमेरिका के साथ कृषि व्यापार संतुलन पिछले पाँच वर्षों में लगभग 10–15 अरब डॉलर के अधिशेष में रहा है, जो भारतीय कृषि निर्यात की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। आगे का लक्ष्य अमेरिका को कृषि-फूड निर्यात को 100 अरब डॉलर से अधिक तक बढ़ाने का रखा गया है, जबकि अमेरिका से भारत में कृषि-फूड आयात भी आगामी वर्षों में लगभग 14–15 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना व्यक्त की गई है।
किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित समझौते में आयात पर कोटा, अतिरिक्त शुल्क और न्यूनतम आयात मूल्य जैसे प्रावधान रखने पर सहमति बनी है। साथ ही, संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस व्यवस्था से बाहर रखने की बात भी कही गई, ताकि घरेलू उत्पादन और कीमतों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। कुल मिलाकर, यह व्यापार सहयोग भारतीय किसानों, कृषि-आधारित उद्योगों और निर्यातकों के लिए लाभकारी साबित होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती


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