नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अद्वितीय योगदान देश के लिए प्रेरणास्रोत – अशोक बालियान

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अद्वितीय योगदान देश के लिए प्रेरणास्रोत – अशोक बालियान

शाहपुर। पीजेंट वेलफ़ेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत के ऐसे महान नेता थे, जिनका जीवन और संघर्ष आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। नेताजी का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक नगर में एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ था। उन्होंने देश की आज़ादी के लिए जो संघर्ष किया, वह भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
अशोक बालियान ने कहा कि नेताजी से पहले भारत की आज़ादी की लड़ाई में हम 1857 की क्रांति का उल्लेख करते हैं। वर्ष 1857 में देश को अंग्रेज़ी शासन से मुक्त कराने के लिए व्यापक विद्रोह हुआ था, जिसमें अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र को क्रांतिकारियों के अनुरोध पर नेतृत्व सौंपा गया। लेकिन दुर्भाग्यवश यह क्रांति सफल नहीं हो सकी और अंग्रेजों ने इसे बेरहमी से कुचल दिया। इसके बाद बहादुर शाह ज़फ़र को दिल्ली के लाल किले में कैद कर लिया गया और बाद में रंगून भेज दिया गया।
उन्होंने कहा कि इतिहास का यह एक अजीब संयोग है कि जिस रंगून में अंतिम मुगल बादशाह को निर्वासित किया गया, उसी धरती से कई दशक बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिंद फ़ौज के माध्यम से भारत की स्वतंत्रता की निर्णायक लड़ाई लड़ी। नेताजी ने अंग्रेज़ों के सामने झुकने के बजाय सशस्त्र संघर्ष का रास्ता चुना और विदेशी धरती पर रहते हुए भी भारत की आज़ादी का स्वप्न साकार करने का प्रयास किया।
अशोक बालियान ने बताया कि नेताजी सुभाष बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को आज़ाद हिंद फ़ौज के सर्वोच्च सेनापति के रूप में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार की स्थापना की। इस सरकार को जर्मनी, जापान, फिलीपाइंस, कोरिया, चीन, इटली, मंचुको और आयरलैंड जैसे देशों ने मान्यता दी थी। जापान ने अंडमान और निकोबार द्वीप भी इस अस्थायी सरकार को सौंप दिए थे, जो नेताजी के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि आज़ाद हिंद फ़ौज का गठन विश्व इतिहास में एक अनूठा उदाहरण है, जहां लगभग 30 से 35 हजार युद्धबंदियों को संगठित कर प्रशिक्षित किया गया और अंग्रेज़ी सत्ता को सीधी चुनौती दी गई। यह नेताजी के नेतृत्व, साहस और संगठन क्षमता का प्रमाण है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का निधन 18 अगस्त 1945 को ताइवान में एक विमान दुर्घटना में हुआ था। 23 अगस्त 1945 को टोकियो रेडियो ने उनके निधन की सूचना प्रसारित की थी। बताया गया कि दुर्घटना में नेताजी गंभीर रूप से झुलस गए थे और उन्हें ताइहोकू सैनिक अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके साथ विमान में सवार जापानी जनरल शोदेई सहित अन्य लोग भी इस दुर्घटना में मारे गए थे।
अशोक बालियान ने कहा कि आज नेताजी के जन्मदिवस पर पूरा देश उनके त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति को नमन करता है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, आत्मसम्मान और बलिदान का मार्ग दिखाता रहेगा।

फोटो कैप्शन । नेताजी की जीवन का अंतिम फोटो


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