खरीफ MSP निर्धारण से पहले CACP बैठक में नए सुझाव रखेंगे अशोक बालियान

खरीफ MSP निर्धारण से पहले CACP बैठक में नए सुझाव रखेंगे अशोक बालियान

मुजफ्फरनगर, 23 फरवरी। केंद्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारण से पूर्व कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की महत्वपूर्ण बैठक 24 फरवरी 2026 को आयोजित की जाएगी। इस बैठक में विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है, जिनमें पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान भी शामिल होंगे। बैठक में आगामी खरीफ सीजन के लिए MSP तय करने से पहले किसान संगठनों के सुझावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
अशोक बालियान ने बताया कि MSP निर्धारण केवल उत्पादन लागत तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय की स्थिरता तथा फसल विविधीकरण से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आयोग के समक्ष पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करेगा।
उन्होंने बताया कि संगठन की ओर से प्रमुख मांग यह होगी कि फसलों का लाभकारी मूल्य वास्तविक लागत (C2) के आधार पर सुनिश्चित किया जाए। साथ ही कटाई के बाद आने वाली वास्तविक लागत (D) को भी मूल्य निर्धारण में समुचित रूप से शामिल किया जाए, ताकि किसानों को उनकी पूरी लागत का उचित प्रतिफल मिल सके।
बालियान ने कहा कि MSP तय करते समय फसलों के जोखिम स्तर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार न्यूनतम सुरक्षा स्तर वाली फसलों पर कम से कम 50 प्रतिशत, जोखिम व मूल्य अस्थिरता वाली फसलों पर 60 से 70 प्रतिशत तथा उच्च जोखिम, नाशवान या रणनीतिक महत्व वाली फसलों पर 70 से 100 प्रतिशत तक लाभांश सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इससे किसानों को जोखिम उठाने का उचित मुआवजा मिल सकेगा और फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि जिन फसलों पर MSP घोषित किया जाता है, उनकी प्रभावी सरकारी खरीद की गारंटी होना अत्यंत आवश्यक है। केवल MSP घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है, जब तक कि किसानों को उस मूल्य पर अपनी उपज बेचने का वास्तविक अवसर न मिले। इसके साथ ही जिन फसलों पर MSP घोषित नहीं है, उनके लिए बाजार हस्तक्षेप योजना को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई गई।
अशोक बालियान ने क्षेत्रीय लागत अंतर को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक मूल्य निर्धारण की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में उत्पादन लागत भिन्न होती है, इसलिए एक समान MSP नीति कई बार किसानों के साथ न्याय नहीं कर पाती। इसके अतिरिक्त उन्होंने आयात-निर्यात नीति को MSP नीति के अनुरूप संतुलित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कारण घरेलू किसानों को नुकसान न उठाना पड़े।
उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा किसान संगठनों से पूर्व विचार-विमर्श की पहल को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि इससे नीति निर्माण में पारदर्शिता और विश्वास दोनों बढ़ेंगे। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने भरोसा जताया है कि वह बैठक में किसानों के हितों की मजबूती के लिए ठोस, व्यावहारिक और रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करेगा, जिससे खरीफ सीजन के लिए घोषित होने वाला MSP किसानों के लिए अधिक लाभकारी और भरोसेमंद बन सके।


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