
मुजफ्फरनगर में पेपर उद्योगों पर कड़ी निगरानी की जरूरत, RDF के प्रयोग से बढ़ रही जन-चिंता : अशोक बालियान
मुजफ्फरनगर में पेपर उद्योगों पर कड़ी निगरानी की जरूरत, RDF के प्रयोग से बढ़ रही जन-चिंता : अशोक बालियान


मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में संचालित पेपर उद्योगों एवं अन्य प्रदूषणकारी उद्योगों द्वारा पर्यावरण मानकों के कड़ाई से अनुपालन और प्रभावी निगरानी व्यवस्था की तत्काल आवश्यकता है। यह बात पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में कही। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिले के कई पेपर उद्योगों में अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (Refuse Derived Fuel – RDF) के प्रयोग को लेकर जनता में गहरी चिंता और आक्रोश व्याप्त है।
अशोक बालियान ने आरोप लगाया कि कुछ औद्योगिक इकाइयों में RDF का उपयोग स्वीकृत तकनीक, निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और उत्सर्जन नियंत्रण नियमों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। RDF में मुख्य रूप से प्लास्टिक, कपड़ा, रबर, कागज, गत्ता एवं अन्य ज्वलनशील गैर-पुनर्चक्रण योग्य सामग्री शामिल होती है, जिन्हें प्रसंस्करण के बाद ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। यदि इसका उपयोग नियमों के अनुसार न हो, तो यह गंभीर प्रदूषण का कारण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि जनपद में बढ़ती जन-चिंता का मुख्य कारण संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण, प्रभावी नियंत्रण और सख्त अनुपालन में लापरवाही है। हालांकि यह भी सत्य है कि मुजफ्फरनगर सहित प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में पेपर उद्योग अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ऐसे में उद्योगों और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना अत्यंत आवश्यक है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि कई पेपर उद्योगों से निकलने वाली फ्लाई ऐश और बॉटम ऐश का समुचित प्रबंधन न होने के कारण राख आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में फैल रही है। इससे लोगों के घरों, कपड़ों और छतों पर काली राख जम जाती है। हवा में घुलने वाले सूक्ष्म कण (PM10 व PM2.5) दमा, एलर्जी, आंखों में जलन और सांस संबंधी बीमारियों का कारण बन रहे हैं, जिसका सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ रहा है।
अशोक बालियान ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति दर्शाती है कि कुछ इकाइयों में चिमनियों, ईएसपी, बैग फिल्टर और ऐश हैंडलिंग सिस्टम या तो अपर्याप्त हैं या उनका सही संचालन नहीं हो रहा। उन्होंने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से नियमित निरीक्षण, ऑनलाइन रियल-टाइम मॉनिटरिंग, थर्ड पार्टी ऑडिट और मानकों के उल्लंघन पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने सुझाव दिया कि RDF का प्रयोग केवल स्वीकृत तकनीक और गुणवत्ता मानकों के तहत हो, राख के बंद संग्रहण व निस्तारण की व्यवस्था अनिवार्य की जाए, रिहायशी क्षेत्रों में प्रदूषण की रियल-टाइम निगरानी हो तथा जन-सुनवाई और शिकायत निवारण तंत्र को सक्रिय किया जाए। अशोक बालियान ने विश्वास जताया कि यदि इन सुझावों पर प्रभावी अमल किया गया, तो उद्योग भी सुचारु रूप से चलेंगे और जनता का विश्वास बहाल होगा, जिससे उत्तर प्रदेश में सतत और उत्तरदायी औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी।











