समाजवादी पार्टी प्रवक्ता के बयान पर भड़का विरोध, अशोक बालियान ने बताया जाट, गुर्जर व ब्राह्मण समाज का अपमान

समाजवादी पार्टी प्रवक्ता के बयान पर भड़का विरोध, अशोक बालियान ने बताया जाट, गुर्जर व ब्राह्मण समाज का अपमान

मुज़फ्फरनगर। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा जाट, गुर्जर एवं ब्राह्मण समाज को लेकर दिए गए बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे बेहद अपमानजनक और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर 14 मई को आयोजित कार्यक्रम में दिए गए वक्तव्य से समाज के विभिन्न वर्गों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
अशोक बालियान ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान राजकुमार भाटी ने अपने संबोधन में जाट और गुर्जर समाज की महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की महिलाओं के चरित्र और सम्मान पर इस प्रकार की टिप्पणी पूरी तरह अस्वीकार्य है। बालियान ने दुख जताया कि मंच पर मौजूद अन्य नेताओं ने भी उस समय इसका विरोध नहीं किया और कुछ लोग हंसते रहे, जबकि ऐसे मामलों में तत्काल विरोध होना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बयान युवाओं में भ्रम फैलाने का कार्य करते हैं। यदि नई पीढ़ी को अपने समाज के इतिहास और गौरवशाली परंपराओं की सही जानकारी न हो तो वे ऐसे बयानों को सच मानने लगते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कई ऐतिहासिक दस्तावेजों और अंग्रेजी लेखकों के शोध का हवाला देते हुए कहा कि जाट और गुर्जर समाज सदैव पारिवारिक मूल्यों और वैवाहिक मर्यादाओं के लिए जाना जाता रहा है।
बालियान ने बताया कि एडवर्ड बैलफोर की पुस्तक The Cyclopaedia of India and of Eastern and Southern Asia (1885) में जाट समाज को हिंदू परंपराओं का पालन करने वाला तथा एक पत्नी प्रथा को मानने वाला समाज बताया गया है। वहीं ब्रिटिश नृवंशविज्ञानी सर डेंजिल इबेट्सन ने अपनी पुस्तक Punjab Castes में जाट और गुर्जर समाज को पूर्णतः पितृसत्तात्मक समाज बताते हुए स्पष्ट किया कि इनमें बहुपति प्रथा जैसी किसी व्यवस्था का कोई स्थान नहीं था।
उन्होंने कहा कि ब्रिटिश कालीन डिस्ट्रिक्ट गजेटियर्स में भी जाट और गुर्जर समाज के कठोर गोत्र नियमों और वैवाहिक अनुशासन का उल्लेख मिलता है। इन दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि एक ही गोत्र या भाईचारे में विवाह प्रतिबंधित था, जिससे यह सिद्ध होता है कि इन समाजों में पत्नी साझा करने जैसी कोई परंपरा कभी अस्तित्व में नहीं रही।
अशोक बालियान ने यह भी कहा कि राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज के संदर्भ में भी अपमानजनक कहावत का प्रयोग किया गया, जिससे समाज में रोष फैल गया है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज भारतीय संस्कृति, शिक्षा और अध्यात्म का प्रमुख आधार रहा है। उन्होंने आर्थर एंथोनी मैक्डोनल और सर हर्बर्ट रिस्ली जैसे विद्वानों के शोध का हवाला देते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज ने शिक्षा, दर्शन, गणित और खगोल विज्ञान जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
अंत में अशोक बालियान ने कहा कि समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता का यह बयान ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत होने के साथ-साथ सामाजिक मर्यादाओं का भी उल्लंघन करता है। उन्होंने मांग की कि राजनीतिक दलों को समाजों के सम्मान और महिलाओं की गरिमा को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदार बयान देने चाहिए।


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