किसानों की बड़ी जीत: दो लाख तक के ऋण पर जमीन बंधक की शर्त समाप्त, किसान नेताओ की मांग के बाद बैंक ने जारी किए निर्देश

किसानों की बड़ी जीत: दो लाख तक के ऋण पर जमीन बंधक की शर्त समाप्त, किसान नेताओ की मांग के बाद बैंक ने जारी किए निर्देश


शाहपुर। सहकारी समितियों से ऋण लेने वाले किसानों की जमीन बंधक बनाने के विरोध में चल रहे आंदोलन को बड़ी सफलता मिली है।गांव गोयला निवासी किसान नेता अनिल चौधरी एवं प्रमुख समाजसेवी राज सिंह आर्य के नेतृत्व में पिछले कई दिनों से किसान इस नियम के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे थे। किसानों के लगातार प्रयासों और जिला सहकारी बैंक मुख्यालय पर कई दौर की वार्ताओं के बाद जिला सहकारी बैंक के सचिव राजेश कुमार ने किसानों की मांग स्वीकार करते हुए मुजफ्फरनगर एवं शामली जनपद की सभी शाखाओं को निर्देश जारी कर दिए हैं कि दो लाख रुपये तक के ऋण पर किसी भी किसान की भूमि बंधक नहीं की जाएगी।


गौरतलब है कि गत दिनों बड़ी संख्या में किसानों ने जिला सहकारी बैंक की शाहपुर शाखा पहुंचकर शाखा प्रबंधक का घेराव किया था। किसानों का आरोप था कि पिछले लगभग एक वर्ष से सहकारी समितियों के माध्यम से दिए जाने वाले ऋण के बदले किसानों की कृषि भूमि बंधक बनाई जा रही है, जबकि पूर्व में बिना भूमि बंधक बनाए ही किसानों को ऋण उपलब्ध कराया जाता था। किसानों का कहना था कि वे स्वयं सहकारी समितियों के शेयरधारक हैं, इसके बावजूद उन्हें अनावश्यक रूप से भूमि बंधक की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।


इस मुद्दे को लेकर किसान नेता अनिल चौधरी एवं राज सिंह आर्य कई बार जिला सहकारी बैंक मुख्यालय मुजफ्फरनगर पहुंचे और बैंक सचिव राजेश कुमार से मुलाकात कर किसानों की समस्या रखी। पिछले एक सप्ताह से लगातार चले प्रयासों के बाद शुक्रवार को हुई बैठक में किसानों की मांग पर सहमति बन गई। इसके बाद सचिव राजेश कुमार ने संबंधित अधिकारियों और शाखा प्रबंधकों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए।
किसान नेता अनिल चौधरी ने कहा कि किसानों को सहकारी समितियों से ऋण लेने के लिए तहसील और अन्य कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे। भूमि बंधक की प्रक्रिया में समय के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा था, जो सरकार की किसान हितैषी नीतियों के विपरीत था। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जनपद मुजफ्फरनगर में परीक्षण के तौर पर लागू की गई थी, जिससे किसानों को भारी परेशानी हो रही थी।
अनिल चौधरी और राज सिंह आर्य ने इस मुद्दे पर सहकारी समिति एवं बैंक के लिए किसानों के बीच से चुने गए अध्यक्षों और निदेशकों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसानों के प्रतिनिधि होने के बावजूद इन पदाधिकारियों ने इस विषय पर कोई प्रभावी आवाज नहीं उठाई। दोनों नेताओं ने कहा कि यदि किसान हितों की रक्षा के लिए चुने गए प्रतिनिधि ही मौन रहेंगे तो किसानों की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी और कर्मचारी ऐसे नियम लागू कर सरकार को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार किसानों के हित में योजनाएं लागू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करा रही है, लेकिन कुछ स्थानीय स्तर के अधिकारी किसान विरोधी नियम लागू कर किसानों में असंतोष पैदा करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।
इस अवसर पर किसान नेताओं ने भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक  के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र सिंह मलिक का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने और किसानों की आवाज को मजबूती देने में सहयोग किया।
किसानों की मांग पूरी होने पर क्षेत्र के किसानों में खुशी का माहौल है। किसानों ने इसे एकजुटता और संघर्ष की जीत बताते हुए कहा कि भविष्य में भी किसान हितों से जुड़े मुद्दों पर इसी प्रकार संगठित होकर आवाज उठाई जाएगी।
इस दौरान कपिल चौधरी, सत्येंद्र फौजी, जोगिंदर सिंह, मदन सिंह, विनोद दत्त त्यागी सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

 


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