
गन्ना (नियंत्रण) आदेश 2026 में किसान हितों को शामिल करने की मांग, अशोक बालियान ने केंद्र सरकार को भेजे महत्वपूर्ण सुझाव
गन्ना (नियंत्रण) आदेश 2026 में किसान हितों को शामिल करने की मांग, अशोक बालियान ने केंद्र सरकार को भेजे महत्वपूर्ण सुझाव
मुज़फ्फरनगर, 07 मई। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने गन्ना किसानों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा जारी प्रस्तावित ‘गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026’ के मसौदे पर अपनी महत्वपूर्ण आपत्तियां और सुझाव भारत सरकार को भेजे हैं। उन्होंने सचिव, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, कृषि भवन नई दिल्ली को पत्र भेजकर किसान हित में कई अहम संशोधनों की मांग की है।
अशोक बालियान ने कहा कि वर्तमान समय में गन्ना किसानों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए नए गन्ना नियंत्रण आदेश में व्यावहारिक और पारदर्शी प्रावधान शामिल किए जाने बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि गन्ने की कीमत केवल चीनी की रिकवरी के आधार पर तय करना उचित नहीं है। आज चीनी मिलें प्रेसमड से सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस), बैगास से बिजली उत्पादन तथा एथेनॉल निर्माण से भी भारी आय अर्जित कर रही हैं। इसलिए एफआरपी और एसएपी निर्धारण में चीनी के साथ-साथ एथेनॉल, मोलासेस, बैगास, प्रेसमड और बिजली बिक्री से होने वाली आय को भी शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही लागत निर्धारण में भूमि का किराया, पूंजी पर ब्याज, जोखिम और प्रबंधन व्यय को भी जोड़ा जाए।
उन्होंने गन्ना खरीद और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए अनिवार्य डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि इससे खरीद में होने वाली गड़बड़ियां रुकेंगी और किसानों तथा चीनी मिलों के बीच भुगतान विवादों में कमी आएगी। इसके अतिरिक्त मिलों के एथेनॉल उत्पादन एवं बिक्री की जानकारी रीयल टाइम डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध कराने तथा उसे जीएसटीएन से जोड़ने की भी मांग की गई है। उन्होंने गन्ने की रिकवरी प्रतिशत की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी अथवा सरकारी स्वतंत्र ऑडिट व्यवस्था को भी अनिवार्य करने का सुझाव दिया।
अशोक बालियान ने कहा कि खांडसारी इकाइयों के साथ-साथ गुड़ इकाइयों को भी एफआरपी और एसएपी व्यवस्था के तहत नियमन के दायरे में लाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे किसानों को सुरक्षित मूल्य मिलेगा और उपभोक्ताओं को शुद्ध एवं मिलावट रहित गुड़ उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने चीनी की तर्ज पर गुड़ और शक्कर का न्यूनतम बिक्री मूल्य निर्धारित करने की भी मांग उठाई।
उन्होंने प्रस्तावित आदेश में चीनी मिलों के बीच न्यूनतम दूरी 25 किलोमीटर किए जाने का विरोध करते हुए इसे पूर्व की भांति 15 किलोमीटर बनाए रखने की मांग की। उनका कहना है कि इससे छोटी इकाइयों और खांडसारी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा तथा किसानों की परिवहन लागत कम होगी।
इसके अलावा उन्होंने चीनी मिलों द्वारा क्रय केंद्र से मिल गेट तक का भाड़ा किसानों के भुगतान से काटे जाने पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह खर्च पूरी तरह मिलों द्वारा वहन किया जाना चाहिए ताकि किसानों को सरकार द्वारा घोषित पूरा लाभकारी मूल्य प्राप्त हो सके।
अशोक बालियान ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार उनके सुझावों को गंभीरता से लेते हुए नए गन्ना नियंत्रण आदेश में शामिल करेगी और गन्ना किसानों को आर्थिक मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने इस विषय पर मंत्रालय स्तर पर भेंटवार्ता के लिए समय दिए जाने का भी अनुरोध किया है।








