सिद्धबली धाम में समाजसेवी पुरनचंद पुरी परिवार द्वारा भंडारे का आयोजन, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
सिद्धबली धाम में समाजसेवी पुरनचंद पुरी परिवार द्वारा भंडारे का आयोजन, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
कोटद्वार। ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध सिद्धबली धाम मंदिर में नगर के प्रमुख समाजसेवी पुरनचंद पुरी द्वारा रविवार को भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पुरनचंद पुरी एवं उनके परिवारजनों ने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ धाम में पहुंचे श्रद्धालुओं को पार्वती रसोई के माध्यम से भंडारे का प्रसाद वितरित किया। भंडारे में दूर-दराज से आए हजारों भक्तों व श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं सम्मान के साथ प्रसाद ग्रहण किया।

भंडारे के आयोजन के दौरान सिद्धबली धाम परिसर में भक्ति और सेवा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। पुरनचंद पुरी, निशांत पुरी, प्रशांत पुरी सहित परिवार के अन्य सदस्यों व रिश्तेदारों ने स्वयं आगे बढ़कर श्रद्धालुओं को आदरपूर्वक प्रसाद परोसा। श्रद्धालुओं ने भी सेवा भाव से किए गए इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे बाबा सिद्धबली की कृपा बताया।
सिद्धबली धाम मंदिर समिति के सदस्यों ने जानकारी देते हुए बताया कि धाम में भंडारे के आयोजन के लिए मंदिर समिति द्वारा तिथियां पूर्व से ही निर्धारित की जाती हैं। वर्तमान समय में सीता रसोई एवं पार्वती रसोई में भंडारे की तिथियां लगभग 10-10 वर्षों के लिए पहले ही बुक हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि सिद्धबली धाम पर भंडारे का आयोजन होना स्वयं बाबा सिद्धबली का विशेष आशीर्वाद माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने पहुंचते हैं।







मंदिर समिति ने सिद्धबली धाम की धार्मिक मान्यताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस धाम की एक अलग ही पहचान और आस्था है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ बाबा सिद्धबली से मनोकामना मांगता है, बाबा उसे अवश्य आशीर्वाद देते हैं और उसकी मनोकामना पूरी करते हैं। यही कारण है कि सिद्धबली धाम वर्ष भर श्रद्धालुओं से भरा रहता है।
रविवार को आयोजित इस भंडारे में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भंडारे के सफल आयोजन से सिद्धबली धाम परिसर में सेवा, समर्पण और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने पुरनचंद पुरी एवं उनके परिवार का आभार व्यक्त करते हुए बाबा सिद्धबली से उनके परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।











