सोरम से हुई सामाजिक बदलाव की शुरुआत: सर्वखाप पंचायत के निर्णय के बाद मृत्यु भोज पर लगा प्रतिबंध, परिवार ने सादगी से करने का लिया निर्णय

सोरम से हुई सामाजिक बदलाव की शुरुआत: सर्वखाप पंचायत के निर्णय के बाद मृत्यु भोज पर लगा प्रतिबंध, परिवार ने सादगी से करने का लिया निर्णय

रिपोर्टर रविन्द्र कुमार

 

शाहपुर। सर्वखाप पंचायत द्वारा लिए गए ऐतिहासिक निर्णय का पहला प्रभाव गांव सोरम में देखने को मिला, जहां मृत्यु भोज पर प्रतिबंध की पहल की औपचारिक शुरुआत हो गई। गांव सोरम के प्रतिष्ठित एवं संपन्न किसान परिवार से संबंध रखने वाले 96 वर्षीय चौधरी अजब सिंह पुत्र पृथ्वी सिंह का 15 नवंबर को देहांत हो गया था। अपने पीछे वह तीन पुत्रों समेत एक हरा-भरा और शिक्षित परिवार छोड़ गए। उनके परिवार के चार सदस्य सरकारी सेवा में कार्यरत हैं तथा खेती-बाड़ी और सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण सोरम के संपन्न परिवारों में उनकी गिनती होती है।

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पारित परम्पराओं के अनुसार उनके पुत्रों की इच्छा थी कि अपने पिता के सम्मान में एक भव्य तेहरवीं व मृत्यु भोज का आयोजन किया जाए। जैसे ही इसकी जानकारी बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत तक पहुंची, उन्होंने तुरंत गुरुवार को सर्वखाप मंत्री चौधरी सुभाष बालियान के साथ मृतक चौधरी अजब सिंह के आवास पहुंचकर परिवार को समझाया। उन्होंने सर्वखाप पंचायत में लिए गए निर्णय—जिसमें मृत्यु भोज पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है—का पालन करने का आग्रह किया।

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चौधरी नरेश टिकैत के आग्रह और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की भावना को देखते हुए मृतक के पुत्र जोगिंदर सिंह, मगेंद्र सिंह और सुरेंद्र सिंह ने इस निर्णय का सम्मान करते हुए आगामी 27 नवंबर को होने वाली तेहरवीं को सीमित, सादगीपूर्ण और परम्परागत रूप से मनाने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि वे समाज में बदलाव लाने वाली इस मुहिम का हिस्सा बनकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

चौधरी टिकैत ने सुझाव दिया कि तेहरवीं के दिन सुबह हवन के पश्चात ही रस्म पगड़ी व श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाए ताकि अनावश्यक खर्च और दिखावे की परंपरा पर पूर्ण विराम लगाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि गंगा में अस्थि विसर्जन की पुरानी परंपरा में बदलाव करते हुए अस्थियों को खेत में दबाकर मृतक की स्मृति में एक पौधा रोपित किया जाए। उसके पास नेम प्लेट लगाने से भविष्य की पीढ़ियों को अपने पूर्वजों की याद और प्रेरणा मिलती रहेगी।

इस निर्णय के समर्थन में गांव सोरम के साथ-साथ रसूलपुर, काकड़ा, शाहजुद्दी और गोयला के भी अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे। इस दौरान सोरम निवासी चौधरी सत्यवीर सेक्रेटरी ने भी सुझाव देते हुए कहा कि मृत्यु भोज की जगह हवन के बाद केवल पताशे के रूप में प्रसाद वितरण कर सादगी को बढ़ावा दिया जाए। सर्वखाप मंत्री चौधरी सुभाष बालियान ने कहा कि मृत्यु भोज पर प्रतिबंध की शुरुआत सोरम से हुई है और जल्द ही इसका संदेश दूर-दूर तक जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि अन्य गांव और अन्य खाप भी यह सकारात्मक कदम उठाकर समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने में सहयोग करेंगे।

मास्टर रामपाल सिंह ने सोरम में हुई इस पहल को बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम बताया और कहा कि अन्य लोग भी इस परिवार का अनुसरण करते हुए फिजूलखर्ची पर रोक लगाकर खाप पंचायत के फैसले का मान बढ़ाएंगे।

इस अवसर पर, प्रधान करणवीर सिंह, बबलू बालियान, विजेंद्र चेयरमैन, विकास बालियान, जयपाल, राम भजन, जगदीश, ऋषिपाल चेयरमैन गोयला, जितेंद्र प्रमुख गोयला, कंवरपाल, चौधरी देशपाल सिंह, मांगेराम, जितेंद्र बालियान (भाकियू ब्लॉक अध्यक्ष), चंद्रवीर सिंह, अखलाक चौधरी, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त रिटायर्ड सूबेदार सुरेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह, पर्णपाल सिंह, सतेंद्र प्रधान रसूलपुरजाटान, विजेंद्र बालियान रसूलपुर सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

सोरम से शुरू हुई यह पहल अब सामाजिक सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है, जो आने वाले दिनों में कई गांवों के लिए प्रेरणा बनेगी।


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