भारत-अमेरिका ट्रेड डील में किसानों के खिलाफ कौन-सी शर्त है? विरोध करने वाले संगठन स्पष्ट करें: अशोक बालियान

भारत-अमेरिका ट्रेड डील में किसानों के खिलाफ कौन-सी शर्त है? विरोध करने वाले संगठन स्पष्ट करें: अशोक बालियान

मुज़फ्फरनगर, 19 फरवरी 2026।

पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर उठ रही आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी संगठन को इस समझौते से किसानों के हित प्रभावित होने की आशंका है, तो वे स्पष्ट रूप से बताएं कि समझौते की कौन-सी शर्त किसानों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से जारी की गई जानकारी उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों, आर्थिक विश्लेषण और तथ्यों पर आधारित है, न कि किसी राजनीतिक या भावनात्मक दृष्टिकोण पर।
बालियान ने कहा कि कुछ समूह किसानों के बीच यह धारणा बना रहे हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से भारतीय कृषि व्यवस्था कमजोर हो जाएगी, जबकि व्यापार समझौतों का मूल उद्देश्य निर्यात-आयात को सुगम बनाना, नए बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करना और निवेश व तकनीक के अवसर बढ़ाना होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समझौते में भारत ने अनाज, डेयरी, दाल और तेलहन जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को पूर्ण रूप से सुरक्षित रखा है, जिससे इन क्षेत्रों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि मसाले, फल-सब्ज़ियां, प्रोसेस्ड फूड, चाय और कॉफी जैसे उत्पादों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत है और इन क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में शून्य या अत्यंत कम शुल्क पर पहुंच मिलने से किसानों को सीधा लाभ होगा। भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार में प्राथमिकता वाले साझेदार के रूप में अवसर मिला है, जो दीर्घकालीन निर्यात वृद्धि के लिए सकारात्मक संकेत है।
बालियान के अनुसार, वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत तक किया गया है, जबकि रेशम उत्पादों को 113 बिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार में शून्य प्रतिशत आयात शुल्क पर पहुंच प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि 1.36 बिलियन अमेरिकी डॉलर के भारतीय कृषि निर्यात पर अब अमेरिका में अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। साथ ही 1.035 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कृषि उत्पादों के लिए अमेरिका ने शून्य पारस्परिक शुल्क का आश्वासन दिया है।
इसके अतिरिक्त, 13 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बाजार वाले कुछ उत्पादों को भी 0 प्रतिशत ड्यूटी एक्सेस प्राप्त हुआ है। बालियान ने दावा किया कि यह समझौता शुल्क के संदर्भ में भारत के पक्ष में स्पष्ट अंतर उत्पन्न करता है, क्योंकि कई प्रतिस्पर्धी देशों—जैसे चीन (35%), वियतनाम (20%), बांग्लादेश (20%), मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, कंबोडिया और थाईलैंड (लगभग 19%)—को अब भी अधिक शुल्क का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि इससे भारतीय कृषि निर्यातकों को स्थिरता, पूर्वानुमान की सुविधा और दीर्घकालीन व्यापार योजना बनाने में मदद मिलेगी। अंत में उन्होंने कहा कि देशहित और किसानहित जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए। यदि किसी को उनके तथ्यों पर आपत्ति है तो वे दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करें, अन्यथा किसानों के बीच भ्रम फैलाने से बचें।


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