
भारत-अमेरिका ट्रेड डील से किसानों को बड़ा लाभ: अशोक बालियान
भारत-अमेरिका ट्रेड डील से किसानों को बड़ा लाभ: अशोक बालियान
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर किसानों के बीच फैलाई जा रही भ्रांतियों पर पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि यह समझौता भारतीय किसानों के हित में है। उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर बताया कि अमेरिका ने भारत के कई प्रमुख कृषि-खाद्य उत्पादों को शून्य शुल्क पर निर्यात की सहमति दी है, जबकि कुछ संगठन गलत तरीके से यह प्रचार कर रहे हैं कि भारत अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क करेगा और भारतीय निर्यात पर 18 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा।
अशोक बालियान ने कहा कि यह दावा पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने जानकारी दी कि अमेरिका में शून्य शुल्क पर निर्यात किए जाने वाले प्रमुख भारतीय उत्पादों में मसाले (काली मिर्च, इलायची, हल्दी), चाय, कॉफी व उनके प्रोसेस्ड उत्पाद, नारियल, कॉप्रा, नारियल तेल, काजू, चेस्टनट, ब्राजील नट, सुपारी, आम, अमरूद, केला, पपीता, अनानास, कीवी, मशरूम, फल-सब्जियों के जूस, पल्प व जैम शामिल हैं। इसके अलावा जौ, कैनरी सीड, कोको व कोको उत्पाद, तिल, खसखस, बेकरी व प्रोसेस्ड फूड तथा वेजिटेबल वैक्स जैसे उत्पाद भी सूची में शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि समझौते से पहले भारत अमेरिका से आयात होने वाले कृषि उत्पादों पर 15 से 50 प्रतिशत तक टैरिफ वसूलता था। ट्रेड डील के बाद भारत कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क में सीमित कमी करेगा, जबकि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए भारी टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से घटाकर औसतन 18 प्रतिशत तक लाने की बात कही है। यह 18 प्रतिशत केवल व्यापक व्यापार का औसत स्तर है, न कि कृषि उत्पादों पर अलग से लगाया जाने वाला शुल्क।
बालियान के अनुसार, भारत को अमेरिका के 206 अरब डॉलर के कृषि आयात बाजार में बड़ी राहत मिलेगी। इसमें से 46 अरब डॉलर के बाजार में मसाले, चाय, कॉफी, फल और प्रोसेस्ड फूड को शून्य शुल्क पर प्रवेश मिलेगा, जबकि 160 अरब डॉलर के बाजार में कुछ उत्पाद कम शुल्क पर निर्यात किए जा सकेंगे। साथ ही 1.035 अरब डॉलर के विशिष्ट भारतीय कृषि निर्यात पर भविष्य में अतिरिक्त शुल्क न लगाने का आश्वासन भी दिया गया है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किसानों को आश्वस्त किया है कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी नुकसानदेह उत्पाद को समझौते में शामिल नहीं किया गया है। बालियान ने अपील की कि किसी भी ट्रेड डील पर राय बनाने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और ठोस आंकड़ों का अध्ययन करना जरूरी है, ताकि किसानों के हितों पर तथ्यात्मक चर्चा हो सके।











