भारत में संस्थागत इस्लामी नेतृत्व का बड़ा हिस्सा आतंक-रोधी नीति से असहमत: अशोक बालियान

भारत में संस्थागत इस्लामी नेतृत्व का बड़ा हिस्सा आतंक-रोधी नीति से असहमत: अशोक बालियान

शाहपुर। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन (पीडब्ल्यूए) के चेयरमैन अशोक बालियान ने कहा कि भारत में संस्थागत इस्लामी नेतृत्व का एक बड़ा हिस्सा मोदी सरकार की आतंकवाद-रोधी नीति का समर्थन नहीं करता और अक्सर आतंकवाद से जुड़े अभियोगों को धार्मिक उत्पीड़न करार देकर संदिग्धों का बचाव करता है। अपनी हाल की अमेरिका (अमेरिका/यूएसए) यात्रा से लौटने के बाद उन्होंने बताया कि ग्लोबल हिंदू हेरिटेज फाउंडेशन (ग्लोबल हिंदू हेरिटेज फाउंडेशन–जीएचएचएफ) के अध्यक्ष डॉ. वेलागपुडी प्रकाशराव, प्रमुख हिंदू नेता सुनील अग्रवाल, विज्ञान गोटेवाल, पंकज कुमार, श्रीनिवास गौर और अजय अग्रवाल से मुलाकात के दौरान अंतरराष्ट्रीय (इंटरनेशनल) आतंकवाद और मुस्लिम ब्रदरहुड (मुस्लिम ब्रदरहुड) की वैश्विक गतिविधियों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

बालियान ने बताया कि एक समय अमेरिकी नीति-निर्माताओं (पॉलिसी मेकर्स) ने मुस्लिम ब्रदरहुड के तथाकथित “अहिंसक” गुटों से संवाद स्थापित करने की रणनीति अपनाई थी, लेकिन बाद में यह स्पष्ट हुआ कि यह गलत धारणा थी। कारण यह कि कट्टर इस्लामी शिक्षा व्यक्ति को शुरुआती चरण में ही बहुलवाद, व्यक्तिगत अधिकारों और धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) कानूनों से विमुख कर देती है, और यही वैचारिक ढांचा जिहादी आतंकवाद की बुनियाद बनता है। अमेरिका में मुस्लिम ब्रदरहुड वर्षों तक “द कल्चरल सोसाइटी” (द कल्चरल सोसाइटी) नाम से गुप्त गतिविधियाँ चलाता रहा।

उन्होंने कहा कि भारत में भी कई इस्लामी संगठन सामाजिक व धर्मार्थ गतिविधियों की आड़ में अपने असली एजेंडे को छिपाने का कार्य कर रहे हैं। दिल्ली के लाल किले पर हुए विस्फोटक हमले के संदिग्धों में भी प्रारंभिक जांच में मुस्लिम ब्रदरहुड की विचारधारा से प्रेरित होने के संकेत मिले थे। बालियान ने आरोप लगाया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद, देवबंद ने आईएसआईएस (आई-एस-आई-एस), अल-कायदा (अल-क़ायदा) और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों से जुड़े अनेक आरोपियों को कानूनी सहायता प्रदान की है। इसका कानूनी प्रकोष्ठ वर्ष 2007 में मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देशन में गठित किया गया था।

बालियान ने कहा कि भारत में आतंकवाद को प्रभावी रूप से रोकने के लिए केवल आतंकी ठिकानों और मॉड्यूल्स (मॉड्यूल) का सफाया काफी नहीं है, बल्कि उन्हें फंडिंग, लॉजिस्टिक (लॉजिस्टिक) समर्थन और वैचारिक संरक्षण देने वाले नेटवर्क पर भी कठोर कार्रवाई आवश्यक है। अमेरिका ने पैट्रियट एक्ट-2001 (पैट्रियट एक्ट) और ऑथराइजेशन फॉर यूज़ ऑफ मिलिट्री फोर्स-2001 (ऑथराइजेशन फॉर यूज़ ऑफ मिलिट्री फोर्स) के माध्यम से सीमापार लक्षित (टारगेटेड) कार्रवाई की क्षमता विकसित की है, जिसके तहत वह कई देशों में एकतरफा ऑपरेशन (ऑपरेशन) संचालित करता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि बदलते वैश्विक खतरे-परिदृश्य को देखते हुए भारत को भी इसी प्रकार का कानून बनाना चाहिए, जिससे विदेशी धरातल से संचालित आतंकी ढांचों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके। बालियान ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर यह बहस अब अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।


जवाब जरूर दे 

आप अपने सहर के वर्तमान बिधायक के कार्यों से कितना संतुष्ट है ?

View Results

Loading ... Loading ...


Related Articles