ग्रेटर नोएडा हादसा शहरी आपदा प्रबंधन की बड़ी विफलता : अशोक बालियान

ग्रेटर नोएडा हादसा शहरी आपदा प्रबंधन की बड़ी विफलता : अशोक बालियान


  1. ग्रेटर नोएडा में निर्माणाधीन बेसमेंट में कार गिरने से युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मृत्यु को पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने शहरी आपदा प्रबंधन प्रणाली की गंभीर विफलता बताया है। उन्होंने इस संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कहा कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि संसाधनों की कमी से उपजी प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है।
    अशोक बालियान ने कहा कि 17 जनवरी की रात्रि को कोहरे और तेज गति के कारण युवराज मेहता की कार सड़क से फिसलकर एक निर्माणाधीन बेसमेंट में गिर गई, जिसमें लगभग 30 फीट तक पानी भरा था। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित बिल्डर कंपनियों द्वारा साइट पर आवश्यक सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे, न ही पर्याप्त बैरिकेडिंग और चेतावनी व्यवस्था थी।
    उन्होंने बताया कि हादसे के बाद युवराज मेहता ने साहस दिखाते हुए कार की छत पर शरण ली और अपने पिता को फोन कर रेस्क्यू की सूचना दी। मौके पर फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीमें पहुंचीं, परंतु उनके पास डीप-वॉटर रेस्क्यू के लिए आवश्यक आधुनिक संसाधन उपलब्ध नहीं थे। बाद में एनडीआरएफ टीम को बुलाया गया, जिसने स्टीमर के माध्यम से युवक को बाहर निकाला, किंतु तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
    अशोक बालियान ने कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक है कि समय पर सूचना और प्रयास के बावजूद केवल संसाधनों के अभाव में एक होनहार युवा की जान नहीं बचाई जा सकी। यह घटना शहरी आपदा प्रबंधन व्यवस्था में गंभीर खामियों को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में फायर डिपार्टमेंट के पास मोटराइज्ड बोट, अंडरवाटर लाइटिंग, प्रशिक्षित गोताखोर और त्वरित तैनाती वाली अर्बन रेस्क्यू यूनिट पहले से उपलब्ध रहती है, जिससे ‘गोल्डन ऑवर’ में ही रेस्क्यू संभव हो पाता है।
    उन्होंने प्रमुख चिंताओं के रूप में फायर ब्रिगेड व एसडीआरएफ के पास अर्बन वॉटर रेस्क्यू उपकरणों की कमी, एनडीआरएफ पर अत्यधिक निर्भरता, निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी तथा नगर विकास प्राधिकरणों की स्पष्ट जवाबदेही न होना बताया।
    अशोक बालियान ने सरकार से मांग की कि प्रत्येक महानगर में अर्बन वॉटर रेस्क्यू यूनिट का गठन किया जाए, फायर ब्रिगेड व एसडीआरएफ को आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण दिया जाए, निर्माणाधीन बेसमेंट व खुले गड्ढों पर अनिवार्य बैरिकेडिंग लागू की जाए तथा रेस्क्यू में देरी या संसाधन-अभाव की स्वतंत्र जांच व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि युवराज मेहता की मृत्यु भविष्य के लिए चेतावनी है और अब ठोस सुधार अनिवार्य हो गए हैं।

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