धर्म के आधार पर आतंकी हमले चिंता का विषय, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर कार्रवाई जरूरी: अशोक बालियान

धर्म के आधार पर आतंकी हमले चिंता का विषय, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर कार्रवाई जरूरी: अशोक बालियान

 

मुजफ्फरनगर | 18 दिसंबर 2025
पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और भारत के पहलगांव में हुई आतंकी घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि आतंकवादियों द्वारा धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बनाया जाना वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल स्थानीय स्तर की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि आतंक के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, फंडिंग और प्रशिक्षण तंत्र को भी प्रभावी ढंग से निशाना बनाना होगा।

बालियान ने कहा कि सिडनी की घटना को लेकर दुनिया भर में चर्चा है, वहीं मध्य सीरिया के ऐतिहासिक शहर पलमायरा में आईएसआईएस से जुड़े हमले में अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की खबरें भी सामने आई हैं। उन्होंने इन घटनाओं को वैश्विक आतंकवाद के व्यापक संदर्भ में देखते हुए कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय संगठनों की विचारधारा, संसाधन और रणनीतियों को समझे बिना केवल सैन्य कदम कारगर सिद्ध नहीं होंगे।

अपने बयान में उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए 1972 के म्यूनिख ओलंपिक से लेकर मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया में दशकों से चले आ रहे आतंकवादी हमलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इजराइल समेत कई देशों को लगातार हिंसा का सामना करना पड़ा है, जिससे नागरिक सुरक्षा पर गहरा असर पड़ा है। घनी आबादी वाले इलाकों में आतंकियों की मौजूदगी संघर्ष को और जटिल बनाती है, जिसका खामियाजा निर्दोष नागरिकों को उठाना पड़ता है।

अशोक बालियान ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में न्यूयॉर्क, लंदन, पेरिस, बाली, ढाका सहित अनेक वैश्विक शहर आतंकवाद से प्रभावित हुए हैं। नाइजीरिया में बोको हराम और सीरिया-इराक क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि यह समस्या सीमाओं तक सीमित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद से जुड़े वैचारिक पहलुओं पर खुली और ईमानदार चर्चा आवश्यक है।

उन्होंने  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2017 के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें इस्लामी उग्रवाद से प्रेरित आतंकवाद का सामना करने की अपील की गई थी। बालियान के अनुसार, हाल के वर्षों में इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय विमर्श में बदलाव आया है और कई देशों व समाजों में आत्ममंथन शुरू हुआ है।

उन्होंने कहा कि कुछ मुस्लिम देशों—जैसे मोरक्को, सऊदी अरब और मलेशिया—में तथा मुस्लिम लेखकों और पत्रकारों के बीच धार्मिक ग्रंथों की हिंसा-समर्थक व्याख्याओं पर पुनर्विचार की चर्चा चल रही है। सऊदी अरब के सुधारवादी मौलाना मंसूर अल-नोगीदान के हवाले से उन्होंने कहा कि इस्लामी मूल विश्वासों में सुधार की आवश्यकता पर विचार होना चाहिए।

अंत में अशोक बालियान ने जोर देकर कहा कि जिहादी आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में मुस्लिम समाज के सुधारवादी और मानवतावादी तत्वों को प्रमुखता देना समय की मांग है। उनके अनुसार, इन्हीं प्रयासों से समाज के भीतर सकारात्मक परिवर्तन संभव होगा और विश्व शांति की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए जा सकेंगे।


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