लिव-इन रिलेशनशिप और धर्मांतरण के मामलों पर गहराई से चिंतन आवश्यक: हिन्दू युवतियों की सुरक्षा को लेकर अशोक बालियान ने कि सामाजिक रिपोर्ट जारी

: लिव-इन रिलेशनशिप और धर्मांतरण के मामलों पर गहराई से चिंतन आवश्यक: हिन्दू युवतियों की सुरक्षा को लेकर अशोक बालियान ने कि सामाजिक रिपोर्ट जारी

शाहपुर/मुजफ्फरनगर।
लिव-इन रिलेशनशिप, कथित धोखाधड़ी, यौन शोषण और धर्मांतरण के दबाव से जुड़े मामलों को लेकर समाज में बढ़ती चिंता के बीच पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान द्वारा एक विस्तृत सामाजिक रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट में हाल के वर्षों में विशेष रूप से हिन्दू युवतियों से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए इसे एक गंभीर सामाजिक चुनौती बताया गया है, जिस पर समय रहते ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आए एक ताजा मामले का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि इस तरह की घटनाएं समाज को चेतावनी दे रही हैं। आरोप है कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के एक रेजिडेंट डॉक्टर ने एक हिन्दू युवती को शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला। मानसिक प्रताड़ना से परेशान युवती ने आत्महत्या का प्रयास तक किया। पीड़िता के परिजनों का दावा है कि आरोपी पहले भी एक अन्य हिन्दू युवती का धर्मांतरण कर उससे विवाह कर चुका था, जिसकी जानकारी जानबूझकर छिपाई गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक समस्या की ओर इशारा करता है।
अशोक बालियान ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अनेक मामलों में यह देखने को मिला है कि लिव-इन रिलेशनशिप में जाने वाली युवतियां अधिकतर हिन्दू परिवारों से होती हैं, जबकि इसके विपरीत उदाहरण बहुत कम सामने आते हैं। कई मामलों में ऐसे रिश्तों का अंत धोखा, हिंसा, सामाजिक अलगाव और धर्मांतरण के दबाव के रूप में होता है। रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि स्वयं को सेकुलर या धार्मिक रूप से तटस्थ मानने वाली और पारिवारिक निगरानी से दूर रहने वाली युवतियां ऐसे मामलों में अधिक असुरक्षित पाई जाती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार समस्या के मूल कारणों में परिवारों द्वारा संस्कार, धर्म और विवाह जैसे विषयों पर खुलकर संवाद न करना, देर से विवाह, भावनात्मक असुरक्षा, आधुनिकता के नाम पर सांस्कृतिक मूल्यों से दूरी तथा लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर स्पष्ट और प्रभावी कानूनों का अभाव प्रमुख हैं। लिव-इन रिलेशनशिप के नाम पर कानूनी और सामाजिक सुरक्षा की कमी युवतियों को असुरक्षित स्थिति में डाल देती है।
समाधान के तौर पर रिपोर्ट में कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें लिव-इन रिलेशनशिप के नियमन या उस पर स्पष्ट कानून बनाने, धर्म, नाम, पहचान या वैवाहिक स्थिति छिपाकर धोखा देने पर कठोर सजा का प्रावधान करने की मांग शामिल है। इसके साथ ही परिवारों से अपील की गई है कि वे अपनी बेटियों को सनातन संस्कार, विवाह परंपराओं और पारिवारिक मूल्यों की शिक्षा दें तथा उनसे जीवन से जुड़े निर्णयों पर खुलकर संवाद करें। उचित आयु में, शिक्षा और सहमति के साथ विवाह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने, लिव-इन रिलेशनशिप के कानूनी पहलुओं और संभावित जोखिमों की जानकारी देने तथा समाज में वास्तविक अनुभव साझा कर चेतना बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है।
अंत में अशोक बालियान ने कहा कि लखनऊ की घटना एक गंभीर चेतावनी है। यदि परिवार, समाज और सरकार समय रहते नहीं चेते, तो स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है। हिन्दू समाज को आत्ममंथन करते हुए अपनी बेटियों की सुरक्षा, संस्कार और भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।


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